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रविवार, 15 जून 2025

राजस्थान के प्रमुख महोत्सव// rajasthan culture/ #ras #rpsc #rsmssb #vdo #patwari #4thgrade #rajasthanpolice

 राजस्थान के प्रमुख महोत्सव ( जनवरी - दिसम्बर):-


(अति महत्वपूर्ण )


• जयपुर लिटरेचर दिवस - जयपुर (जनवरी)


• चेतक अश्व मेला - राजसमंद (जनवरी, 2 साल से बंद)


• जैसलमेर पंतग महोत्सव - जैसलमेर (फरवरी)


• मरु महोत्सव - जैसलमेर (जनवरी - फरवरी)


• हाथी महोत्सव - जयपुर (मार्च)


• जालौर महोत्सव - जालौर (फरवरी)


• शेखावाटी महोत्सव - लक्ष्मणगढ़, सीकर (मार्च)


• बैलून महोत्सव - बाड़मेर (अप्रैल)


• गणगौर मेला - जयपुर (मार्च - अप्रैल)


• ग्रीष्म महोत्सव - जयपुर व मांउट आबू (मई)


• मैंगो फेस्टिवल - बांसवाड़ा (जून)


• तीज उत्सव - जयपुर (अगस्त,श्रावण शु. 3)


• हिंडोला महोत्सव - कृष्ण मंदिरो में (श्रावण शुक्ल पक्ष)


• कजली तीज मेला - बूंदी (भाद्रपद कृष्ण 3)


• आभानेरी महोत्सव - आभानेरी (दौसा) अक्टूम्बर


• मारवाड़ महोत्सव - जोधपुर (अक्टूबर)


• मीरा महोत्सव - चितौड़गढ (अक्टूबर)


• मत्स्य महोत्सव - अलवर (नवम्बर)


• बूंदी महोत्सव - बूंदी (नवम्बर - दिसम्बर)


• कुंभलगढ फेस्टिवल - राजसमंद (दिसम्बर)


• रणकपुर महोत्सव - पाली (दिसम्बर)


• शरद महोत्सव - माउंट आबू (दिसम्बर)


• शिल्पग्राम महोत्सव - उदयपुर (दिसम्बर)


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बुधवार, 11 जून 2025

राजस्थान की प्राचीन सभ्यताएं

 

राजस्थान की प्राचीन सभ्यताएं

पुरातत्ववेत्ताओं के अनुसार राजस्थान का इतिहास पूर्व पाषाण काल से प्रारंभ होता है। आज से करीब एक लाख वर्ष पहले मनुष्य मुख्यतः बनास नदी के किनारे या अरावली के उस पार की नदियों के किनारे निवास करता था। आदिम मनुष्य अपने पत्थर के औजारों की मदद से भोजन की तलाश में हमेशा एक स्थान से दूसरे स्थान को जाते रहते थे, इन औजारों के कुछ नमूने बैराठ, रैध और भानगढ़ के आसपास पाए गए हैं।
प्राचीनकाल में उत्तर-पश्चिमी राजस्थान में वैसा मरुस्थल नहीं था जैसा वह आज है। इस क्षेत्र से होकर सरस्वती और दृशद्वती जैसी विशाल नदियां बहा करती थीं। इन नदी घाटियों में हड़प्पा, ‘ग्रे-वैयर’ और रंगमहल जैसी संस्कृतियां फली-फूलीं। यहां की गई खुदाइयों से खासकर कालीबंग के पास, पांच हजार साल पुरानी एक विकसित नगर सभ्यता का पता चला है। हड़प्पा, ‘ग्रे-वेयर’ और रंगमहल संस्कृतियां सैकडों दक्षिण तक राजस्थान के एक बहुत बड़े इलाके में फैली हुई थीं।

बैराठ सभ्यता

जिला – जयपुर
नदी – बाणगंगा
समय – 600 ईसा पुर्व से 1 ईस्वी
काल – लौह युगीन
खोजकर्ता/ उत्खनन कर्ता – 1935 – 36 दयाराम साहनी
प्रमुख स्थल – बीजक की पहाड़ी, भीम की डुंगरी, महादेव जी डुंगरी

विशेषता

मत्स्य जनपद की राजधानी – विराटनगर
(मत्स्य जनपद – जयपुर, अलवर, भरतपुर)
विराटनगर – बैराठ का प्राचीन नाम है।

महाभारत संस्कृति के साक्ष्य
पाण्डुओं ने अपने 1 वर्ष का अज्ञातवास विराटनगर के राजा विराट के यहां व्यतित किया था।

बौद्धधर्म के साक्ष्य
बैराठ से हमें एक गोलाकार बौद्ध मठ मिला है।

मौर्य संस्कृति के साक्ष्य
मौर्य समाज – 322 ईसा पुर्व से 184 ईसा पुर्व

सम्राट अशोक का भाब्रु शिलालेख बैराठ से मिला है।
भाब्रु शिलालेख की खोज – 1837 कैप्टन बर्ट
वर्तमान में भाब्रु शिलालेख कोलकत्ता के संग्रहालय में सुरक्षित है।
इसकी भाषा – प्राकृत भाषा
लिपी – ब्राह्मी लिपि

हिन्द-युनानी संस्कृति के साक्ष्य
यहां से 36 चांदी के सिक्के प्राप्त हुए हैं 36 में से 28 सिक्के हिन्द – युनानी राजाओं के है। 28 में से 16 सिक्के मिनेण्डर राजा(प्रसिद्ध हिन्द – युनानी राजा) के मिले हैं।
शेष 8 सिक्के प्राचीन भारत के सिक्के आहत(पंचमार्क) है।

कालीबंगा सभ्यता

जिला – हनुमानगढ़
नदी – सरस्वती(वर्तमान की घग्घर)
समय – 3000 ईसा पूर्व से 1750 ईसा पूर्व तक। राजस्थान की सबसे पुराणी सभ्यता
काल – ताम्र युगीन काल
खोजकर्ता – 1952 अमलानन्द घोस
उत्खनन कर्ता – (1961-69) बी. बी. लाल (बृजबासी लाल), बी. के. थापर(बालकृष्ण थापर)
कालीबंगा शाब्दीक अर्थ – काली चुडि़यां

कालीबंगा सभ्यता की विशेषताएं:

जुते हुऐ खेत के साक्ष्य
यह नगर दो भागों में विभाजित है और दोनों भाग सुरक्षा दिवार(परकोटा) से घिरे हुए हैं।
लकड़ी से बनी नाली के साक्ष्य प्राप्त हुए है।
यहां से ईटों से निर्मित चबुतरे पर सात अग्नि कुण्ड प्राप्त हुए है जिसमें राख एवम् पशुओं की हड्डियां प्राप्त हुई है। यहां से ऊंट की हड्डियां प्राप्त हुई है, ऊंट इनका पालतु पशु है।
यहां से सुती वस्त्र में लिपटा हुआ ‘उस्तरा‘ प्राप्त हुआ है।
यहां से कपास की खेती के साक्ष्य प्राप्त हुए है।
जले हुए चावल के साक्ष्य प्राप्त हुए हैं।
युगल समाधी के साक्ष्य प्राप्त हुए हैं।
यहां से मिट्टी से निर्मिट स्केल(फुटा) प्राप्त हुआ है।
यहां से शल्य चिकित्सा के साक्ष्य प्राप्त हुआ है। एक बच्चे का कंकाल मिला है।

आहड़ सभ्यता

जिला – उदयपुर
नदी – आयड़(बेड़च नदी के तट पर)
समय – 1900 ईसा पुर्व से 1200 ईसा पुर्व
काल – ताम्र पाषाण काल
खोजकर्ता – 1953 अक्षय कीर्ति व्यास
उत्खनन कर्ता – 1956 आर. सी. अग्रवाल(रत्नचन्द्र अग्रवाल) तथा एच.डी.(हंसमुख धीरजलाल) सांकलिया।
आहड़ का प्राचीन नाम – ताम्रवती नगरी
10 या 11 शताब्दी में इसे आघाटपुर/आघाट दुर्ग कहते थे।
स्थानीय नाम – धुलकोट

आहड़ सभ्यता की विशेषताएं:

ताम्बे की मुहरें तथा मुद्राएं , एक मुद्रा पर एक ओर त्रिशूल एवं दूसरी और अपोलो अंकित है जिसके हाथ में तीर है तथा पीछे तरकश है।
ताम्बा गलाने की भट्टी मिली है।
यहाँ के निवासी शवों को आभूषणों सहित दफनाते थे।
यह सभ्यता बनास नदी सभ्यता का हिस्सा थी इसलिए इसे बनास संस्कृति भी कहते हैं।

बालाथल सभ्यता

जिला – उदयपुर(वल्लभनगर तहसील के पास)
नदी – बनास

समय – 1900 ईसा पुर्व से 1200 ईसा पुर्व तक
आहड़ सभ्यता से सम्बधित ताम्र युगीन स्थल

खोजकर्ता व उत्खनन कत्र्ता – 1993 वी. एन. मिश्र(विरेन्द्र नाथ मिश्र)

विशेषता-
यहाँ एक बड़ा भवन, दुर्ग, सांड व कुत्ते की मूर्तियों के साथ ताम्बे के आभूषण मिले है।
मिश्रित अर्थव्यवस्था के साक्ष्य मिले हैं।
कृषि के साथ – साथ पशुपालन का प्रचलन था।

गिलुण्ड सभ्यता

जिला – राजसमंद
खोजकर्ता / उत्खनन कर्ता – 1957- 58 वी. बी.(वृज बासी) लाल
आहड़ सभ्यता से सम्बधित ताम्र युगीन सभ्यता
बनास के किनारे यह सभ्यता विकसित हुई थी।
यह 1500 ई. पू. की सभ्यता है।

गणेश्वर सभ्यता

जिला – सीकर, नीम का थाना तहसील
खोजकर्ता/उत्खनन कत्र्ता – 1977 आर. सी.(रत्न चन्द्र) अग्रवाल
नदी – कांतली
समय – 2800 ईसा पुर्व
काल – ताम्रयुगीन सभ्यता

विशेषताएं-
मछली पकड़ने का कांटा मिला है।
ताम्र निर्मित बरछी (कुल्हाड़ी ) मिली है।
शुद्ध तांबे निर्मित तीर, भाले, तलवार, बर्तन, आभुषण, सुईयां मिले हैं।


सुनारी सभ्यता

जिला – झुन्झुनू
तांबा गलाने की भट्टीयां मिली है।

रेड सभ्यता

जिला – टोंक
लौहे के भण्डार प्राप्त हुए हैं।
इस कारण इसे ‘प्राचीन भारत का टाटानगर’ कहा जाता है।

नालियासर सभ्यता

जिला – जयपुर
लोहा युगीन सभ्यता

रंगमहल, पीलीबंगा

जिला – हनुमानगढ़
कांस्ययुगीन सभ्यता(सिन्धु घाटी सभ्यता के स्थल)
करणपुरा(नोहर) नवीनतम स्थल

नगरी सभ्यता

जिला – चित्तौड़गढ़
नगरी का प्राचीन नाम – मध्यमिका

नगर सभ्यता

जिला – टोंक
प्राचीन नाम – मालव नगर

शनिवार, 7 जून 2025

राजस्थान के प्रसिद्ध पठार// राजस्थान के पर्वत और पठार//राजस्थान के प्रमुख पठार

 राजस्थान के प्रसिद्ध पठार// राजस्थान के पर्वत और पठार//राजस्थान के प्रमुख पठार


उड़िया पठार :- सिरोही, 1360 मीटर 

(गुरुशिखर के निचे स्थित राजस्थान का सबसे ऊँचा पठार)

भौराठ का पठार :- कुम्भलगढ़ (राजसमंद) से गोगुन्दा (उदयपुर) तक, 1225 मीटर 

राज्य का दूसरा ऊँचा पठार 

इस पठार की सबसे ऊँची छोटी जरगा 

आबू का पठार :- सिरोही, 1200 मीटर 

तीसरा सबसे ऊँचा पठार 

इस पर सबसे ऊँचा बसा शहर - माउंट आबू 

राजस्थान का दूसरा ऊंचाई पर बसा शहर - प्रतापगढ़ 

उपरमाल का पठार :- भैंसरोड़गढ़ (चित्तौरगढ़) से बिजोलिया (भीलवाड़ा) तक 

लसाड़िया का पठार :- सलूम्बर, जयसमंद झील के पूर्वी भाग मे

मेसा का पठार :- इस पर चित्तौड़गढ़ दुर्ग स्थित है।

धीराजी का पठार :- चित्तौड़गढ़

मानदेसरा पठार :-  चित्तौड़गढ़, भैंसरोड़गढ़ अभयारण्य 

भोमट  का पठार:- दक्षिणी उदयपुर, सलूम्बर, उतरी डुगरपुर, पूर्वी सिरोही

काकंन वाडी पठार :- अलवर में सरिस्का अभयारण्य  में स्थित ।

इन पठारों के अलावा, राजस्थान में अन्य पठार भी हैं, जैसे कि: 

    हाड़ौती पठार: कोटा, बूंदी, झालावाड़, बारां और भीलवाड़ा जिलों में फैला हुआ है.

  • मारवाड़ पठार: यह पश्चिमी राजस्थान में स्थित है.
  • सेंट्रल हाइलैंड: यह मध्य भारत में स्थित है.
  • बुंदेलखंड अपलैंड: यह मध्य भारत में स्थित है.
  • मालवा पठार: यह मध्य भारत में स्थित है.
  • बघेलखंड पठार: यह मध्य भारत में स्थित है.
  • छोटा नागपुर पठार: यह पूर्वी भारत में स्थित है.

शुक्रवार, 6 जून 2025

1857 विद्रोह का क्रम, क्रांति की तिथि & स्थान

 1857 विद्रोह का क्रम, क्रांति की तिथि & स्थान ✅

▪️28 मई, 1857 नसीराबाद में विद्रोह ▪️31 मई, 1857 भरतपुर राज्य में विद्रोह ▪️3 जून, 1857 नीमच में विद्रोह ▪️10 जून, 1857 देवली छावनी में विद्रोह ▪️14 जून, 1857 टोंक राज्य में विद्रोह ▪️11 जुलाई, 1857 अलवर राज्य में विद्रोह ▪️9 अगस्त, 1857 अजमेर के केंद्रीय कारागार में विद्रोह ▪️21 अगस्त, 1857 एरिनपुरा के सैनिकों का विद्रोह ▪️23 अगस्त, 1857 जोधपुरा लीजियन में विद्रोह ▪️8 सितम्बर, 1857 बिटौड़ा / बिथोड़ा का युद्ध ▪️18 सितम्बर 1857 चेलावास का युद्ध ▪️27 अक्टूबर, 1857 धौलपुर राज्य में विद्रोह ▪️15 अक्टूबर, 1857 कोटा में विद्रोह

राजस्थान में केन्द्र सरकार द्वारा संचालित औद्योगिक उपक्रम // औद्योगिक उपक्रम

 राजस्थान में केन्द्र सरकार द्वारा संचालित औद्योगिक उपक्रम -

(1) हिन्दुस्तान जिंक लिमिटेड (HZL)- देबारी (उदयपुर) (2) हिन्दुस्तान कॉपर लिमिटेड (HCL) - खेतड़ी (झुंझुनूं) (3) हिन्दुस्तान मशीन टूल्स (HMT) - अजमेर (4) सांभर साल्ट लिमिटेड (SSL)- सांभर (जयपुर) (5) इन्स्ट्रूमेन्टेशन लिमिटेड (ILK) - कोटा (6) मॉडर्न बेकरिज इंडिया लिमिटेड - जयपुर (7) राजस्थान इलेक्ट्रॉनिक एंड इन्स्ट्रूमेन्टेशन लिमिटेड (REIL, रील)- कनकपुरा (जयपुर)

मामा भांजा विशेष (अति महत्वपूर्ण जीके)// [ Patwari , VDO ,REET Mains Exam]

 मामा भांजा विशेष (अति महत्वपूर्ण जीके)

▪️मामा - भांजा महल - झालावाड़ ▪️मामा - भांजा मंदिर - अटरू (बारां) व डूंगरपुर ▪️मामा - भांजा छतरी - मेहरानगढ़ (जोधपुर) ▪️मामा - भांजा की मजार - भटनेर दुर्ग (हनुमानगढ़) ▪️मामा- भांजा की मस्जिद - टोंक ▪️मामा- भांजा की दरगाह - जोधपुर ▪️मामा- भांजा डूंगरी - दौसा

नए रामसर साइट

 दो नये रामसर साइट घोषित :-

🔴भारत ने 4 जून 2025 को राजस्थान की खीचनों और मेनार आर्द्रभूमियों को रामसर सूची में शामिल किया। 🔴इस घोषणा के साथ भारत की कुल रामसर साइट की संख्या 91 हो गई है। विशेषताएं :- 1.खीचन (फालोदी, राजस्थान): ( 4 जून 2025 को) - हजारों प्रवासी डेमोसिल क्रेनों को आकर्षित करने के लिए प्रसिद्ध।
2.मेनार (उदयपुर, राजस्थान): ( 4 जून 2025 को) - "पक्षी गांव" के रूप में प्रसिद्ध। प्रमुख तथ्य :- रामसर साइट:- ऐसी आर्द्रभूमि जिसे अंतरराष्ट्रीय महत्व की मान्यता प्राप्त है। यह 1971 में ईरान के रामसर शहर में हस्ताक्षरित रामसर सम्मेलन के अंतर्गत आता है। उद्देश्य:- आर्द्राभूमियों के संरक्षण और विवेकपूर्ण उपयोग को बढ़ावा देना है। भारत 1982 में रामसर सम्मेलन का हिस्सा बना था। 📝 📝 📌📌📌📌

गुरुवार, 5 जून 2025

आईपीएल अवार्ड्स 2025|| ipl awards 2025|| sports current affairs|| #currentaffairs #gk #ssc #rpsc

आईपीएल 2025 (IPL 2025) का 18वां संस्करण 22 मार्च से 3 जून तक चला, जिसमें 10 टीमों ने 74 मैचों में हिस्सा लिया। रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु ने पंजाब किंग्स को हराकर पहला खिताब जीता, जबकि गुजरात टाइटन्स के साई सुदर्शन ने सर्वाधिक रन (759) बनाए और प्रसिद्ध कृष्णा ने सर्वाधिक विकेट (25) लिए. 
आईपीएल 2025 के कुछ रोचक तथ्य:
  • नया चैंपियन: आरसीबी ने पहली बार आईपीएल खिताब जीता.
  • सबसे ज्यादा रन: साई सुदर्शन ने 759 रन बनाए.
  • सबसे ज्यादा विकेट: प्रसिद्ध कृष्णा ने 25 विकेट लिए.
  • नया रिकॉर्ड: वैभव सूर्यवंशी ने सबसे तेज आईपीएल सेंचुरी बनाई.
  • विवादित निर्णय: कुछ अंपायरिंग के फैसले विवादों में रहे.
  • विजेता टीम: आरसीबी ने 20 करोड़ रुपये जीते.
  • उपविजेता टीम: पंजाब किंग्स ने 12.5 करोड़ रुपये जीते.
  • आईपीएल 2025 में कुछ प्रमुख खिलाड़ियों की प्रदर्शन:
  • साई सुदर्शन: सबसे ज्यादा रन बनाने वाले खिलाड़ी. 
    प्रसिद्ध कृष्णा: सबसे ज्यादा विकेट लेने वाले खिलाड़ी. 
    वैभव सूर्यवंशी: सबसे तेज आईपीएल सेंचुरी बनाने वाले खिलाड़ी.  
    विराट कोहली: बाउंड्रीज की संख्या में 1000 का आंकड़ा पार करने वाले पहले खिलाड़ी.  
    श्रेयस अय्यर: तीन अलग टीमों को फाइनल में पहुंचाने वाले पहले कप्तान. 
  • अन्य महत्वपूर्ण तथ्य:
  • आईपीएल 2025 को कई रिकॉर्डों के टूटने के लिए याद किया जाएगा.
  • यह सीजन 18वें सीजन के इतिहास में दर्ज हो गया है.
  • कई खिलाड़ियों ने इस सीजन में अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया.
  • यह सीजन यादगार रहेगा, क्योंकि इसमें कई रोमांचक मैच और रिकॉर्ड बने.
  • आईपीएल के इतिहास में यह एक महत्वपूर्ण सीजन रहा है. 


 

  अध्याय 2 : मेंडेलियन आनुवंशिकी (Mendelian Genetics) 2.1 परिचय (Introduction) आनुवंशिकी के क्षेत्र में प्रथम सफल प्रयोग तथा वंशागति के नियम...