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शुक्रवार, 23 जनवरी 2026

 

अध्याय 2 : मेंडेलियन आनुवंशिकी (Mendelian Genetics)

2.1 परिचय (Introduction)

  • आनुवंशिकी के क्षेत्र में प्रथम सफल प्रयोग तथा वंशागति के नियमों का प्रतिपादन ग्रेगर जॉन मेंडेल ने किया।

  • मेंडेल ऑस्ट्रिया (Austria) के एक गिरजाघर के पादरी थे।

  • उन्होंने मटर के पौधे (Pisum sativum) पर अनेक नियंत्रित संकरण प्रयोग किए।

  • प्राप्त परिणामों का गणितीय विश्लेषण करके वंशागति के कुछ मूल नियम स्थापित किए।

  • इन नियमों को मेंडेलवाद (Mendelism) या मेंडेल के वंशागति के नियम (Mendel’s laws of inheritance) कहा जाता है।

प्रमुख परिभाषाएँ

  • वंशागति (Inheritance) – माता‑पिता से संतान में लक्षणों का स्थानांतरण।

  • वंशागत लक्षण (Hereditary characters) – वे गुण जो जनकों (Parents) से संतति (Offspring) में स्थानांतरित होते हैं।


2.2 ग्रेगर जॉन मेंडेल का संक्षिप्त जीवनवृत्त (Brief Life Sketch of Gregor Johann Mendel)

  • जन्म : 22 जुलाई 1822

  • जन्म स्थान : हाइनज़ेंडोर्फ (Heinzendorf), सिलेसिया प्रांत, ऑस्ट्रिया

  • परिवार : एक माली के परिवार में जन्म

  • बचपन से ही सजीव वस्तुओं एवं प्रकृति में गहरी रुचि

शिक्षा एवं जीवन

  • प्रारम्भिक शिक्षा अपने गाँव के विद्यालय में प्राप्त की।

  • 1842 में दर्शनशास्त्र (Philosophy) में डिग्री प्राप्त की।

  • अक्टूबर 1843 में ब्रून (Brunn) के चर्च में पादरी बने।

  • यहीं पर उन्हें बगीचे की सुविधा मिली जहाँ प्रयोग किए।

  • 1849 में एक वर्ष तक अध्यापन कार्य किया।

  • बाद में प्राकृतिक विज्ञान एवं गणित के अध्ययन हेतु वियना विश्वविद्यालय गए।

  • कुछ समय बाद पुनः ब्रून लौटकर विज्ञान के अध्यापक बने।

वैज्ञानिक योगदान

  • तर्क और गणितीय विश्लेषण में अद्भुत प्रतिभा।

  • अध्यापन काल में गिरजाघर के उद्यान में मटर के पौधों पर संकरण प्रयोग किए।

  • इन्हीं प्रयोगों से वंशागति के प्रसिद्ध नियम स्थापित हुए।


परीक्षा उपयोगी मुख्य बिंदु (Quick Revision Points)

  • मेंडेल को “आनुवंशिकी का जनक” कहा जाता है।

  • प्रयोग की मुख्य वस्तु – मटर का पौधा (Pisum sativum)

  • मेंडेल के नियम – वंशागति के मूल नियम

  • वंशागत लक्षण – जनकों से संतति में आने वाले गुण

मेंडेल के प्रयोगों का विवरण (अतिरिक्त जानकारी)

  • मेंडेल ने मटर (Pisum sativum) के पौधों पर 1857 से 1865 तक संकरण (Hybridization) प्रयोग किए।

  • 1865 में अपने प्रयोगों के निष्कर्ष "ब्रून सोसाइटी ऑफ नेचुरल हिस्ट्री" के समक्ष शोधपत्र के रूप में प्रस्तुत किए।

  • 1866 में यह कार्य "पादप संकरण के प्रयोग" नामक शोधपत्र में प्रकाशित हुआ।

  • इन्हीं परिणामों के आधार पर वंशागति के नियमों का प्रतिपादन किया गया।

  • उस समय वैज्ञानिक इस कार्य का महत्व नहीं समझ पाए, इसलिए मेंडेल के नियम लंबे समय तक उपेक्षित रहे।

  • 6 जनवरी 1884 को मेंडेल की मृत्यु हो गई। मृत्यु के समय वे दीर्घकालीन वृक्कशोथ (Chronic nephritis) से पीड़ित थे।


2.3 मेंडेलवाद की पुनर्खोज (Rediscovery of Mendelism)

  • मेंडेल के नियम लगभग 35 वर्षों तक उपेक्षित रहे।

  • सन् 1900 में स्वतंत्र रूप से तीन वैज्ञानिकों ने मेंडेल के नियमों की पुनः खोज की –

    1. ह्यूगो डी व्रीस (Hugo de Vries) – हॉलैंड

    2. कार्ल कोरेंस (Karl Correns) – जर्मनी

    3. एरिक वॉन शेरमाक (Erick Von Tschermak) – ऑस्ट्रिया

  • इन तीनों वैज्ञानिकों को मेंडेलवाद के पुनर्खोजकर्ता माना जाता है।


2.4 मेंडेल के प्रयोग (Mendel’s Experiments)

प्रयोग की मुख्य विशेषताएँ

  • प्रयोग की वस्तु – मटर का पौधा (Pisum sativum)

  • प्रयोग के प्रकार –

    • एकसंकर संकरण (Monohybrid hybridization)

    • द्विसंकर संकरण (Dihybrid hybridization)

लक्षणों का चयन

  • मेंडेल ने मटर में 34 विपरीत लक्षणों (Contrasting characters) का अध्ययन किया।

  • विस्तृत प्रयोग केवल 7 प्रमुख लक्षणों पर किए।

  • प्रत्येक लक्षण के दो स्पष्ट विपरीत रूप थे (जैसे – लंबा/बौना, गोल/झुर्रीदार बीज आदि)।


परीक्षा हेतु अत्यंत महत्वपूर्ण तथ्य

  • प्रयोग काल – 1857 से 1865

  • शोधपत्र प्रस्तुति – 1865

  • प्रकाशन वर्ष – 1866

  • मृत्यु – 6 जनवरी 1884

  • मेंडेलवाद की पुनर्खोज – सन् 1900

  • पुनर्खोजकर्ता – Hugo de Vries, Karl Correns, Erick Von Tschermak



2.4.1 प्रयोग के लिये मटर पौधे की उपयुक्तता (Suitability of Pea Plant)

  • मटर एकवर्षीय पौधा है – एक वर्ष में कई पीढ़ियों का अध्ययन संभव।

  • फूल उभयलिंगी होते हैं – परपरागण व विपुंसन (Emasculation) आसानी से किया जा सकता है।

  • प्राकृतिक रूप से स्वपरागित – शुद्ध वंश (Pure line) प्राप्त करना सरल।

  • अनेक स्पष्ट विपरीत लक्षण उपलब्ध।


2.4.2 मेंडेल की अध्ययन विधि एवं सफलता के कारण

  • शुद्ध नस्ल (Pure breeding) पौधों का चयन।

  • एक समय में केवल एक लक्षण का अध्ययन।

  • सही सांख्यिकीय अभिलेख एवं गणितीय विश्लेषण।

  • F₃ पीढ़ी तक अध्ययन।


2.4.3 मटर के सात जोड़ी विपरीत लक्षण (Selection of Traits)

  1. पौधे की लंबाई – लंबा / बौना

  2. फूलों की स्थिति – कक्षीय (Axillary) / अग्रस्थ (Terminal)

  3. फली का रूप – चपटा / संकीर्ण

  4. कच्ची फली का रंग – हरा / पीला

  5. बीज की आकृति – गोल / झुर्रीदार

  6. बीजचोल का रंग – धूसर / श्वेत

  7. बीजपत्र का रंग – पीला / हरा


2.5 मेंडेल द्वारा किये गये प्रयोग

  • जनक पीढ़ी (P), प्रथम संतानीय पीढ़ी (F₁), द्वितीय संतानीय पीढ़ी (F₂)

  • मुख्य प्रयोग –

    • एकसंकर संकरण (Monohybrid cross)

    • द्विसंकर संकरण (Dihybrid cross)


2.5.1 एकसंकर संकरण (Monohybrid Cross)

  • एक जोड़ी विपरीत लक्षणों के बीच संकरण।

  • उदाहरण – लंबा (TT) × बौना (tt)

परिणाम

  • F₁ पीढ़ी – सभी पौधे लंबे (Tt) – प्रभावी लक्षण प्रकट।

  • F₂ पीढ़ी –

    • लक्षण अनुपात (Phenotype) = 3 लंबा : 1 बौना

    • जीन अनुपात (Genotype) = 1 TT : 2 Tt : 1 tt


2.5.2 द्विसंकर संकरण (Dihybrid Cross)

  • दो जोड़ी विपरीत लक्षणों का एक साथ अध्ययन।

  • उदाहरण – गोल-पीला (RRYY) × झुर्रीदार-हरा (rryy)

परिणाम

  • F₁ – सभी गोल-पीले (RrYy)

  • F₂ लक्षण अनुपात = 9 : 3 : 3 : 1

    • 9 गोल पीले

    • 3 गोल हरे

    • 3 झुर्रीदार पीले

    • 1 झुर्रीदार हरे


2.6 मेंडेल के आनुवंशिकता के नियम (Mendel’s Laws of Inheritance)

(1) प्रभाविता का नियम (Law of Dominance)

  • विषमयुग्मजी अवस्था में केवल प्रभावी लक्षण प्रकट होता है।

(2) पृथक्करण का नियम / युग्मकों की शुद्धता (Law of Segregation)

  • युग्मक निर्माण के समय जीन युग्म अलग-अलग हो जाते हैं।

  • प्रत्येक युग्मक में एक ही कारक जाता है।

(3) स्वतंत्र अपव्यूहन का नियम (Law of Independent Assortment)

  • भिन्न लक्षणों के जीन स्वतंत्र रूप से वंशागति करते हैं।

  • द्विसंकर संकरण पर लागू।


2.7 मेंडेल के नियमों का महत्व (Importance of Mendel’s Laws)

  • संकरण संतानों का पूर्वानुमान संभव।

  • उपयोगी लक्षणों का विकास व हानिकारक लक्षणों का निष्कासन।

  • उन्नत किस्मों का विकास – फसल व पशुपालन में उपयोग।

  • मानव आनुवंशिकी एवं सुजनिकी (Eugenics) का आधार।


अत्यंत महत्वपूर्ण तथ्य (Quick Revision)

  • एकसंकर अनुपात – 3 : 1

  • जीन अनुपात – 1 : 2 : 1

  • द्विसंकर अनुपात – 9 : 3 : 3 : 1

  • F₁ में केवल प्रभावी लक्षण दिखाई देता है।

  • स्वतंत्र अपव्यूहन नियम द्विसंकर संकरण पर आधारित है।


गुरुवार, 22 जनवरी 2026

भौतिक एवं रासायनिक परिवर्तन// Physical and Chemical Changes// // LDC// JR. ACCOUNTANT// RAS// REET, 3rd grade, 2nd grade, 1ST grade exam TOP 100 MCQS

 

Chapter 1 – भौतिक एवं रासायनिक परिवर्तन | 100 MCQ टेस्ट (REET / 2nd / 3rd Grade)

Chapter 1 – भौतिक एवं रासायनिक परिवर्तन

REET / 2nd / 3rd Grade Practice Test (100 MCQs)

अध्याय 1 – भौतिक एवं रासायनिक परिवर्तन// Physical and Chemical Changes// // LDC// JR. ACCOUNTANT// RAS// REET, 3rd grade, 2nd grade, 1ST grade exam

 

📘 अध्याय 1 – भौतिक एवं रासायनिक परिवर्तन

(Physical and Chemical Changes)

🔹 भूमिका (Introduction)

  • जब किसी पदार्थ को गर्म या ठंडा किया जाता है तो उसकी अवस्था बदल सकती है।

    • जल गरम करने पर → भाप

    • ठंडा करने पर → बर्फ

  • कभी-कभी पदार्थ जलाने या अभिक्रिया करने पर नया पदार्थ बन जाता है

  • पदार्थों में होने वाले परिवर्तन दो प्रकार के होते हैं –
    1️⃣ भौतिक परिवर्तन (Physical Change)
    2️⃣ रासायनिक परिवर्तन (Chemical Change)


🔹 भौतिक परिवर्तन (Physical Change)

✅ परिभाषा

जिस परिवर्तन में पदार्थ की भौतिक अवस्था या आकार बदलता है लेकिन
उसकी रासायनिक संरचना एवं गुण नहीं बदलते, उसे भौतिक परिवर्तन कहते हैं।

✨ मुख्य बिंदु

  • कोई नया पदार्थ नहीं बनता

  • परिवर्तन सामान्यतः उलटने योग्य (Reversible) होता है

  • केवल अवस्था, आकार, रूप या स्थिति बदलती है

  • अणु की संरचना वही रहती है

🧪 उदाहरण

  • बर्फ का पिघलना

  • जल का वाष्प में बदलना

  • नौसादर का उर्ध्वपातन

  • शक्कर का पानी में घुलना

  • काँच का टूटना

  • सोने का पिघलना

  • लोहे का चुंबक में बदलना

🧬 महत्वपूर्ण तथ्य

  • जल चाहे भाप बने या बर्फ → उसका अणुसूत्र हमेशा H₂O ही रहता है

  • नौसादर (NH₄Cl) ठोस व गैस दोनों अवस्था में भी वही रहता है

📘 भौतिक परिवर्तन के गुण (Properties of Physical Change)

✨ मुख्य बिंदु

1️⃣ भौतिक परिवर्तन में पदार्थ के आकार, अवस्था, आयतन, ताप, घनत्व, रंग आदि में परिवर्तन होता है।
2️⃣ पदार्थ के रासायनिक संघटन एवं रासायनिक गुण नहीं बदलते
3️⃣ यह परिवर्तन सामान्यतः उलटने योग्य (Reversible) होता है।
4️⃣ यह परिवर्तन अस्थायी (Temporary) होता है।


🔹 1.2 रासायनिक परिवर्तन (Chemical Change)

✅ परिभाषा

जिस परिवर्तन में पदार्थ से नया पदार्थ बनता है और जो
रासायनिक संघटन एवं गुणों में पूर्णतः भिन्न होता है, उसे रासायनिक परिवर्तन कहते हैं।


🧪 उदाहरण (खाने का सोडा + अम्ल)

जब खाने के सोडे में हाइड्रोक्लोरिक अम्ल मिलाया जाता है तो क्रिया होती है –

NaHCO₃ + HCl → NaCl + H₂O + CO₂↑

  • यहाँ नया पदार्थ बनता है –

    • कार्बन डाइऑक्साइड (CO₂)

    • नमक (NaCl)

    • जल (H₂O)

  • इस क्रिया को वापस पहले जैसा नहीं बनाया जा सकता → इसलिए यह रासायनिक परिवर्तन है।


🧪 रासायनिक परिवर्तन के उदाहरण

  • कोयले का जलना

  • लोहे पर जंग लगना

  • दूध से दही बनना

  • अवक्षेपण

  • दहन

  • किण्वन


🔹 रासायनिक परिवर्तन के गुण (Properties of Chemical Change)

1️⃣ नये पदार्थ बनते हैं जो मूल पदार्थ से रासायनिक गुणों व संघटन में भिन्न होते हैं।
2️⃣ यह परिवर्तन अनुत्क्रमणीय (Irreversible) होता है।
3️⃣ यह परिवर्तन सामान्यतः स्थायी (Permanent) होता है।
4️⃣ इस परिवर्तन में पदार्थ के भौतिक व रासायनिक दोनों गुण बदल जाते हैं


🔹 1.3 रासायनिक अभिक्रिया (Chemical Reaction)

✅ परिभाषा

किसी पदार्थ में रासायनिक परिवर्तन होने की प्रक्रिया को
रासायनिक अभिक्रिया कहते हैं।

✨ मुख्य तथ्य

  • रासायनिक क्रिया में एक पदार्थ दूसरे पदार्थ में बदल जाता है।

  • पदार्थ का रासायनिक संघटन एवं गुण बदल जाते हैं

  • लेकिन कुल द्रव्यमान (Mass) में कोई परिवर्तन नहीं होता
    👉 इसे द्रव्यमान संरक्षण का नियम कहते हैं।

📘 द्रव्यमान संरक्षण का नियम (Law of Conservation of Mass)

✨ उदाहरण

कैल्सियम कार्बोनेट को गर्म करने पर –

CaCO₃ → CaO + CO₂↑

  • CaCO₃ का द्रव्यमान = 100 ग्राम

  • बनने वाला CaO = 56 ग्राम

  • बनने वाली CO₂ = 44 ग्राम

👉 कुल द्रव्यमान = 56 + 44 = 100 ग्राम

✅ निष्कर्ष

रासायनिक अभिक्रिया में
✔️ द्रव्यमान न तो बनता है और न नष्ट होता है
✔️ केवल एक रूप से दूसरे रूप में बदलता है


🔹 रासायनिक समीकरण (Chemical Equation)

  • रासायनिक अभिक्रिया को रासायनिक समीकरण द्वारा व्यक्त किया जाता है।

  • जिन पदार्थों से अभिक्रिया होती है → अभिकारक (Reactants)

  • जो नये पदार्थ बनते हैं → उत्पाद (Products)


🔹 रासायनिक अभिक्रियाओं के प्रकार

अभिकारकों के संयोग या उत्पाद बनने के आधार पर अभिक्रियाएँ कई प्रकार की होती हैं।
यहाँ मुख्य अभिक्रिया दी गई है –


🔹 1.3.1 संयोजन अभिक्रिया (Combination Reaction)

✅ परिभाषा

जब दो या दो से अधिक पदार्थ (तत्व या यौगिक) मिलकर
एक नया पदार्थ बनाते हैं, तो उसे संयोजन या योग अभिक्रिया कहते हैं।

✨ सामान्य रूप

A + B → AB


🧪 (i) अकार्बनिक संयोजन अभिक्रिया के उदाहरण

1️⃣ 2Mg + O₂ → 2MgO
(मैग्नीशियम + ऑक्सीजन → मैग्नीशियम ऑक्साइड)

2️⃣ NH₃ + HCl → NH₄Cl
(अमोनिया + हाइड्रोक्लोरिक अम्ल → अमोनियम क्लोराइड)

3️⃣ CO + Cl₂ → COCl₂
(कार्बन मोनोऑक्साइड + क्लोरीन → कार्बोनिल क्लोराइड)


🧪 (ii) कार्बनिक संयोजन अभिक्रिया

  • एथीन (CH₂=CH₂) में हाइड्रोजन जुड़कर → एथेन (CH₃–CH₃) बनता है

  • एथीन में क्लोरीन जुड़कर → एथिल क्लोराइड (CH₂–CH₂Cl) बनता है


🔹 महत्वपूर्ण परीक्षा बिंदु (Exam Points)

✔️ रासायनिक अभिक्रिया में द्रव्यमान संरक्षित रहता है
✔️ अभिकारक → जिनसे अभिक्रिया शुरू होती है
✔️ उत्पाद → जो अभिक्रिया के बाद बनते हैं
✔️ संयोजन अभिक्रिया में हमेशा एक ही उत्पाद बनता है


🔹 1.3.2 विस्थापन अभिक्रिया (Displacement Reaction)

✅ परिभाषा

जब किसी यौगिक में उपस्थित किसी परमाणु या आयन के स्थान पर कोई दूसरा परमाणु या आयन आ जाता है, तो इस प्रक्रिया को विस्थापन अभिक्रिया कहते हैं।

✨ सामान्य रूप

AB + C → AC + B


🧪 मुख्य उदाहरण

CuSO₄ + Zn → ZnSO₄ + Cu

  • जस्ता (Zn) ताँबे (Cu) से अधिक सक्रिय धातु है।

  • Zn, CuSO₄ से ताँबे को विस्थापित कर देता है।

  • परिणामस्वरूप ZnSO₄ बनता है और ताँबा अलग हो जाता है।


🧪 अन्य उदाहरण

1️⃣ CuO + 2AgNO₃ → Cu(NO₃)₂ + Ag₂O
2️⃣ 2ZnS + O₂ → 2ZnO + 2S


🔹 द्विविस्थापन अभिक्रिया (Double Displacement Reaction)

✅ परिभाषा

जब रासायनिक अभिक्रिया में दो यौगिकों के आयन परस्पर अदला-बदली करके
दो नये यौगिक बनाते हैं, तो इसे द्विविस्थापन अभिक्रिया कहते हैं।

✨ सामान्य रूप

AB + CD → AD + CB


🧪 उदाहरण

1️⃣ AgNO₃ + KCl → AgCl + KNO₃
2️⃣ BaCl₂ + Na₂SO₄ → BaSO₄ + 2NaCl


🔹 1.3.3 अपघटन अभिक्रिया (Decomposition Reaction)

✅ परिभाषा

जब कोई एक यौगिक टूटकर दो या दो से अधिक सरल पदार्थों में बदल जाता है, तो इस प्रक्रिया को अपघटन अभिक्रिया कहते हैं।

✨ सामान्य रूप

AB → A + B


✨ विशेष तथ्य

  • अपघटन के लिए ऊर्जा की आवश्यकता होती है।

  • ऊर्जा निम्न रूपों में दी जाती है –
    🔥 ऊष्मा (Heat)
    ⚡ विद्युत (Electricity)
    💡 प्रकाश (Light)

👉 इसी आधार पर अपघटन अभिक्रियाएँ तीन प्रकार की होती हैं –
(अगले भाग में – ऊष्मीय, विद्युत, प्रकाश अपघटन)


🔹 परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण बिंदु

✔️ अधिक सक्रिय धातु कम सक्रिय धातु को विस्थापित करती है
✔️ विस्थापन → एक तत्व हटता है
✔️ द्विविस्थापन → दो आयनों की अदला-बदली
✔️ अपघटन → एक यौगिक टूटकर अनेक पदार्थ बनाता है
✔️ अपघटन में हमेशा ऊर्जा की आवश्यकता होती है


🔹 अपघटन अभिक्रिया के प्रकार (Types of Decomposition Reaction)

अपघटन अभिक्रिया में यौगिक को तोड़ने के लिए ऊर्जा दी जाती है।
ऊर्जा के प्रकार के आधार पर यह तीन प्रकार की होती है –


🧪 1. तापीय अपघटन (Thermal Decomposition)

✅ परिभाषा

जब किसी पदार्थ को गर्म करने पर वह ऊष्मा अवशोषित करके
सरल पदार्थों में टूट जाता है, तो इसे तापीय अपघटन कहते हैं।

✨ उदाहरण

1️⃣ 2KNO₃ (ताप) → 2KNO₂ + O₂
(पोटैशियम नाइट्रेट → पोटैशियम नाइट्राइट + ऑक्सीजन)

2️⃣ 2Pb(NO₃)₂ (ताप) → 2PbO + 4NO₂ + O₂
(लेड नाइट्रेट → लेड ऑक्साइड + नाइट्रोजन डाइऑक्साइड + ऑक्सीजन)


⚡ 2. विद्युत अपघटन (Electrolytic Decomposition)

✅ परिभाषा

जब किसी पदार्थ की गलित या जलीय अवस्था में विद्युत धारा प्रवाहित की जाती है
और वह सरल पदार्थों में टूट जाता है, तो इसे विद्युत अपघटन कहते हैं।

✨ उदाहरण

1️⃣ 2NaCl (विद्युत) → 2Na + Cl₂↑

2️⃣ 2H₂O (विद्युत) → 2H₂↑ + O₂↑


💡 3. प्रकाश द्वारा अपघटन (Photochemical Decomposition)

✅ परिभाषा

जिस रासायनिक अभिक्रिया में कोई यौगिक प्रकाश ऊर्जा अवशोषित करके टूट जाता है,
उसे प्रकाश अपघटन कहते हैं।

✨ उदाहरण

1️⃣ 2O₃ (प्रकाश) → 3O₂

2️⃣ 2HBr (प्रकाश) → H₂ + Br₂


🔹 1.3.4 ऊष्माक्षेपी एवं ऊष्माशोषी अभिक्रिया

(Exothermic and Endothermic Reactions)


🔥 ऊष्माक्षेपी अभिक्रिया (Exothermic Reaction)

✅ परिभाषा

जिस रासायनिक अभिक्रिया में ऊष्मा निकलती है, उसे ऊष्माक्षेपी अभिक्रिया कहते हैं।

✨ उदाहरण

  • पानी में वाशिंग पाउडर घोलने पर गिलास गर्म हो जाना

  • दहन अभिक्रियाएँ

🔹 कारण

  • जब उत्पादों की कुल ऊर्जा < अभिकारकों की कुल ऊर्जा होती है
    👉 तब अतिरिक्त ऊर्जा ऊष्मा के रूप में निकलती है


❄️ ऊष्माशोषी अभिक्रिया (Endothermic Reaction)

✅ परिभाषा

जिस रासायनिक अभिक्रिया में ऊष्मा अवशोषित होती है, उसे ऊष्माशोषी अभिक्रिया कहते हैं।

✨ उदाहरण

  • पानी में शक्कर घोलने पर ठंडक महसूस होना

  • अपघटन अभिक्रियाएँ

🔹 कारण

  • जब उत्पादों की कुल ऊर्जा > अभिकारकों की कुल ऊर्जा होती है
    👉 तब ऊर्जा बाहर से अवशोषित की जाती है


🔹 परीक्षा के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण बिंदु (Very Important Points)

✔️ अपघटन अभिक्रिया में हमेशा ऊर्जा की आवश्यकता होती है
✔️ तापीय अपघटन → ऊष्मा द्वारा
✔️ विद्युत अपघटन → विद्युत धारा द्वारा
✔️ प्रकाश अपघटन → प्रकाश ऊर्जा द्वारा

✔️ ऊष्माक्षेपी → ऊष्मा निकलती है
✔️ ऊष्माशोषी → ऊष्मा ली जाती है

✔️ द्रव्यमान हमेशा संरक्षित रहता है

🔹 ऊष्माक्षेपी एवं ऊष्माशोषी अभिक्रियाएँ (Revision + Examples)

जब उत्पादों की कुल ऊर्जा अभिकारकों से कम होती है → ऊष्मा निकलती है → ऊष्माक्षेपी
जब उत्पादों की कुल ऊर्जा अभिकारकों से अधिक होती है → ऊष्मा ली जाती है → ऊष्माशोषी


🔥 1. ऊष्माक्षेपी अभिक्रिया (Exothermic Reaction)

✅ परिभाषा

वे रासायनिक अभिक्रियाएँ जिनमें ऊष्मा उत्पन्न (निकलती) है,
उन्हें ऊष्माक्षेपी अभिक्रिया कहते हैं।

✨ उदाहरण

1️⃣ N₂ + 3H₂ → 2NH₃ + 93.33 kJ (ऊष्मा)

2️⃣ 2SO₂ + O₂ → 2SO₃ + ऊष्मा

3️⃣ NaOH + HCl → NaCl + H₂O + ऊष्मा
(उदासीनीकरण अभिक्रिया भी ऊष्माक्षेपी होती है)


❄️ 2. ऊष्माशोषी अभिक्रिया (Endothermic Reaction)

✅ परिभाषा

वे रासायनिक अभिक्रियाएँ जिनमें ऊष्मा का अवशोषण होता है,
उन्हें ऊष्माशोषी अभिक्रिया कहते हैं।

✨ उदाहरण

1️⃣ N₂ + O₂ → 2NO – 180 kJ (ऊष्मा ली जाती है)

2️⃣ 2HI → H₂ + I₂ – ऊष्मा


🔹 1.3.5 ऑक्सीकरण तथा अपचयन अभिक्रियाएँ

(Oxidation and Reduction Reactions)


📌 प्रारंभिक विचार

पहले केवल ऑक्सीजन और हाइड्रोजन के आधार पर परिभाषा दी जाती थी।
बाद में परिभाषा का विस्तार हुआ और इलेक्ट्रॉनों (ऋणावेश) के आधार पर भी समझाया गया।


🔥 ऑक्सीकरण (Oxidation)

✅ परिभाषा – ऑक्सीकरण वह प्रक्रिया है जिसमें –

✔️ किसी पदार्थ का ऑक्सीजन से संयोग हो
या
✔️ किसी पदार्थ का ऋणावेशी तत्व (इलेक्ट्रॉन) से संयोग हो
या
✔️ किसी पदार्थ में हाइड्रोजन की कमी हो


✨ (i) ऑक्सीजन के साथ संयोग

1️⃣ C + O₂ → CO₂
2️⃣ 2Mg + O₂ → 2MgO


✨ (ii) ऋणावेशी तत्व से संयोग

1️⃣ Fe + Cl₂ → FeCl₂
2️⃣ SnCl₂ + Cl₂ → SnCl₄

➡️ यहाँ Fe और SnCl₂ का ऑक्सीकरण हो रहा है क्योंकि क्लोरीन जुड़ रहा है।


✨ (iii) हाइड्रोजन की कमी

1️⃣ H₂S → H₂ + S

2️⃣ CH₃CH₂OH → CH₃CHO + H₂
(एथिल अल्कोहल → एसीटैल्डिहाइड)

➡️ यहाँ हाइड्रोजन निकलने से यह ऑक्सीकरण है।


❄️ अपचयन (Reduction) – (याद रखने के लिए)

हालाँकि अगला भाग पेज में आगे होगा, पर परीक्षा के लिए जरूरी है 👇

अपचयन वह प्रक्रिया है जिसमें –

✔️ किसी पदार्थ से ऑक्सीजन निकलती है
या
✔️ किसी पदार्थ में हाइड्रोजन जुड़ता है
या
✔️ किसी पदार्थ को इलेक्ट्रॉन प्राप्त होते हैं


🔹 परीक्षा के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण बिंदु (Very Important Points)

⭐ ऊष्माक्षेपी → ऊष्मा निकलती है
⭐ ऊष्माशोषी → ऊष्मा ली जाती है

⭐ ऑक्सीकरण के लक्षण –
✔️ ऑक्सीजन का जुड़ना
✔️ इलेक्ट्रॉन का निकलना
✔️ हाइड्रोजन का निकलना

⭐ अपचयन के लक्षण –
✔️ ऑक्सीजन का निकलना
✔️ इलेक्ट्रॉन का जुड़ना
✔️ हाइड्रोजन का जुड़ना

⭐ ऑक्सीकरण और अपचयन हमेशा साथ-साथ होते हैं (Redox Reaction)


🔹 ऑक्सीकरण (Oxidation) – Final Notes

✅ ऑक्सीकरण की परिभाषा

ऑक्सीकरण वह रासायनिक अभिक्रिया है जिसमें किसी पदार्थ में –

✔️ ऑक्सीजन का संयोग होता है
या
✔️ ऋण विद्युत तत्व (इलेक्ट्रॉन) निकलते हैं
या
✔️ हाइड्रोजन की कमी होती है
या
✔️ धन विद्युत तत्व की कमी होती है


🔥 उदाहरण –

(i) ऑक्सीजन से संयोग

C + O₂ → CO₂
2Mg + O₂ → 2MgO


(ii) ऋण विद्युत तत्व (क्लोरीन आदि) से संयोग

Fe + Cl₂ → FeCl₂
SnCl₂ + Cl₂ → SnCl₄

➡️ यहाँ Fe और SnCl₂ का ऑक्सीकरण हो रहा है।


(iii) हाइड्रोजन की कमी

H₂S → H₂ + S

CH₃CH₂OH → CH₃CHO + H₂
(एथिल अल्कोहल → एसीटैल्डिहाइड)

➡️ हाइड्रोजन कम होने से यह ऑक्सीकरण है।


(iv) धन विद्युत तत्व की कमी

2KI + Cl₂ → 2KCl + I₂

➡️ KI से K की कमी होने पर KI का ऑक्सीकरण होता है।


🔹 अपचयन (Reduction) – Final Notes

✅ अपचयन की परिभाषा

अपचयन वह रासायनिक अभिक्रिया है जिसमें –

✔️ हाइड्रोजन का संयोग होता है
या
✔️ ऋण विद्युत तत्व का संयोग होता है
या
✔️ ऑक्सीजन की कमी होती है
या
✔️ धन विद्युत तत्व का संयोग होता है


❄️ उदाहरण –

(i) हाइड्रोजन से संयोग

H₂ + Cl₂ → 2HCl
2Na + H₂ → 2NaH (सोडियम हाइड्राइड)

➡️ यहाँ अपचयन हो रहा है।


(ii) ऋण विद्युत तत्व से संयोग

Cl₂ + Mg → MgCl₂
I₂ + Hg → HgI₂

➡️ Cl₂ और I₂ का अपचयन हो रहा है।


(iii) ऑक्सीजन की कमी

2MgO → 2Mg + O₂
2ZnO → 2Zn + O₂

➡️ ऑक्सीजन निकलने से यह अपचयन है।


(iv) धन विद्युत तत्व का संयोग

2FeCl₃ → 2FeCl₂ + Cl₂
FeS → Fe + S

➡️ FeCl₃ → FeCl₂ तथा FeS → Fe = अपचयन


🔹 Redox का Golden Rule (बहुत जरूरी 🔥)

⭐ ऑक्सीकरण और अपचयन हमेशा साथ-साथ होते हैं
⭐ किसी एक का ऑक्सीकरण होगा तो दूसरे का अपचयन जरूर होगा


🔹 परीक्षा के लिए सुपर महत्वपूर्ण One-liners

✔️ ऑक्सीकरण = ऑक्सीजन का जुड़ना / हाइड्रोजन का निकलना / इलेक्ट्रॉन का निकलना
✔️ अपचयन = ऑक्सीजन का निकलना / हाइड्रोजन का जुड़ना / इलेक्ट्रॉन का जुड़ना
✔️ जिस पदार्थ का ऑक्सीकरण होता है वही दूसरे का अपचयन कराता है
✔️ सभी Redox अभिक्रियाएँ युग्म (pair) में होती हैं

🔹 1.3.6 ऑक्सीकरण तथा अपचयन की आधुनिक अवधारणा

(Modern Concept of Oxidation and Reduction)

📌 आधुनिक अवधारणाएँ

ऑक्सीकरण–अपचयन को अब दो मुख्य आधारों पर समझा जाता है –

1️⃣ इलेक्ट्रॉनिक अवधारणा (Electronic Concept)
2️⃣ ऑक्सीकरण अंक अवधारणा (Oxidation Number Concept)

👉 यहाँ हम इलेक्ट्रॉनिक अवधारणा पढ़ते हैं।


🔥 इलेक्ट्रॉनिक अवधारणा के अनुसार

✅ ऑक्सीकरण (Oxidation)

ऑक्सीकरण वह रासायनिक अभिक्रिया है जिसमें कोई पदार्थ –

✔️ इलेक्ट्रॉन का त्याग करता है
✔️ धन आवेश बढ़ता है
✔️ ऋण आवेश घटता है

➡️ इसे विअलेक्ट्रॉनिकरण (De-electronation) भी कहते हैं।


🔹 ऑक्सीकरण के प्रकार (Examples सहित)

(i) परमाणु का ऑक्सीकरण

Na → Na⁺ + e⁻
Ca → Ca²⁺ + 2e⁻
Zn → Zn²⁺ + 2e⁻

➡️ इलेक्ट्रॉन निकलने से यह ऑक्सीकरण है।


(ii) धन आयन का ऑक्सीकरण

Fe²⁺ → Fe³⁺ + e⁻
Sn²⁺ → Sn⁴⁺ + 2e⁻
Cu⁺ → Cu²⁺ + e⁻

➡️ धन आवेश बढ़ने से ऑक्सीकरण हुआ।


(iii) ऋण आयन का ऑक्सीकरण

2Cl⁻ → Cl₂ + 2e⁻
MnO₄²⁻ → MnO₄⁻ + e⁻
2O²⁻ → O₂ + 4e⁻

➡️ ऋण आयन इलेक्ट्रॉन छोड़ता है → ऑक्सीकरण


(iv) अणु का ऑक्सीकरण

H₂S → H₂ + S
या
H₂S → 2H⁺ + S²⁻

➡️ यहाँ इलेक्ट्रॉन निकलने से यह ऑक्सीकरण है।


🔹 ऑक्सीकरण में होने वाले परिवर्तन

⭐ इलेक्ट्रॉन निकलते हैं
⭐ धन आवेश बढ़ता है
⭐ ऋण आवेश घटता है


❄️ अपचयन (Reduction) – आधुनिक अवधारणा

✅ परिभाषा

अपचयन वह रासायनिक अभिक्रिया है जिसमें कोई पदार्थ –

✔️ एक या अधिक इलेक्ट्रॉन ग्रहण करता है
✔️ धन आवेश घटता है
✔️ ऋण आवेश बढ़ता है

➡️ इसे इलेक्ट्रॉनिकरण (Electronation) भी कहते हैं।


🔹 अपचयन के उदाहरण

परमाणु का अपचयन

Cl + e⁻ → Cl⁻
S + 2e⁻ → S²⁻

➡️ इलेक्ट्रॉन मिलने से यह अपचयन है।


🔹 Redox का सबसे महत्वपूर्ण नियम 🔥

⭐ ऑक्सीकरण और अपचयन हमेशा साथ-साथ होते हैं
⭐ जहाँ ऑक्सीकरण होगा, वहीं अपचयन भी होगा
⭐ कोई भी अभिक्रिया केवल ऑक्सीकरण या केवल अपचयन नहीं हो सकती


🔹 परीक्षा के लिए Super Important One-liners

✔️ ऑक्सीकरण = इलेक्ट्रॉन का त्याग
✔️ अपचयन = इलेक्ट्रॉन का ग्रहण
✔️ De-electronation = ऑक्सीकरण
✔️ Electronation = अपचयन
✔️ ऑक्सीकरण में धन आवेश बढ़ता है
✔️ अपचयन में ऋण आवेश बढ़ता है
✔️ सभी रेडॉक्स अभिक्रियाएँ युग्म में होती हैं

🔹 आयन का अपचयन (Reduction of Ions)

✅ (क) धन आयन का अपचयन

जब धन आयन इलेक्ट्रॉन ग्रहण करता है, तो अपचयन होता है –

Mg²⁺ + 2e⁻ → Mg
Pb⁴⁺ + 2e⁻ → Pb²⁺

➡️ इलेक्ट्रॉन मिलने से अपचयन हुआ।


✅ (ख) ऋण आयन का अपचयन

Cr₂O₇²⁻ → 2Cr³⁺
NO₃⁻ → NO₂⁻

➡️ ऋण आयन में आवेश घटा → अपचयन


✅ (ग) अणु का अपचयन

MnO₂ → Mn²⁺

➡️ ऑक्सीजन की कमी से यह अपचयन है।


🔹 अपचयन में होने वाले परिवर्तन

⭐ इलेक्ट्रॉन ग्रहण होते हैं
⭐ ऋण आवेश बढ़ता है
⭐ धन आवेश घटता है


🔹 सारणी 1.1 – ऑक्सीकरण एवं अपचयन का तुलनात्मक अध्ययन 🔥

क्रमऑक्सीकरणअपचयन
1️⃣ऑक्सीजन से संयोगहाइड्रोजन से संयोग
2️⃣ऋण विद्युत तत्व से संयोगधन विद्युत तत्व से संयोग
3️⃣हाइड्रोजन की कमीऑक्सीजन की कमी
4️⃣धन विद्युत तत्व की कमीऋण विद्युत तत्व की कमी
5️⃣इलेक्ट्रॉन का त्यागइलेक्ट्रॉन का ग्रहण

👉 यह तालिका REET में बहुत बार पूछी जाती है 🔥


🔹 1.3.7 रेडॉक्स (अपोपचय) अभिक्रिया

(Redox Reaction)

✅ परिभाषा

जिन रासायनिक अभिक्रियाओं में ऑक्सीकरण और अपचयन दोनों एक साथ होते हैं,
उन्हें रेडॉक्स (Redox) अभिक्रिया कहते हैं।

👉 क्योंकि –

  • एक पदार्थ इलेक्ट्रॉन छोड़ता है (ऑक्सीकरण)

  • दूसरा पदार्थ वही इलेक्ट्रॉन ग्रहण करता है (अपचयन)

इसलिए दोनों क्रियाएँ हमेशा साथ-साथ होती हैं।


🔥 रेडॉक्स अभिक्रिया के उदाहरण

1️⃣

Zn + CuSO₄ → ZnSO₄ + Cu

➡️ Zn का ऑक्सीकरण
➡️ Cu²⁺ का अपचयन


2️⃣

Fe₂O₃ + 2Al → Al₂O₃ + 2Fe

➡️ Al का ऑक्सीकरण
➡️ Fe³⁺ का अपचयन


3️⃣

2H₂S + SO₂ → 2H₂O + 3S

➡️ H₂S का ऑक्सीकरण
➡️ SO₂ का अपचयन


🔹 परीक्षा के लिए Super Important Points 🔥

⭐ सभी रेडॉक्स अभिक्रियाओं में ऑक्सीकरण + अपचयन साथ-साथ होते हैं
⭐ केवल ऑक्सीकरण या केवल अपचयन वाली कोई अभिक्रिया नहीं होती
⭐ जो इलेक्ट्रॉन छोड़ता है → वही दूसरे का अपचयन कराता है
⭐ इलेक्ट्रॉन दाता = अपचायक (Reducing agent)
⭐ इलेक्ट्रॉन ग्राही = ऑक्सीकारक (Oxidizing agent)


🔹 Final One-liners (Very Useful for REET)

✔️ ऑक्सीकरण = इलेक्ट्रॉन का त्याग
✔️ अपचयन = इलेक्ट्रॉन का ग्रहण
✔️ Redox = Oxidation + Reduction
✔️ सभी रासायनिक अभिक्रियाएँ Redox नहीं होतीं
✔️ सभी Redox अभिक्रियाओं में ऊर्जा का आदान-प्रदान होता है


🔹 ऑक्सीकारक (Oxidizing Agent)

✅ परिभाषा

वह पदार्थ जो इलेक्ट्रॉन ग्रहण करता है या जिसका अपचयन होता है,
उसे ऑक्सीकारक कहते हैं।

➡️ ऑक्सीकारक स्वयं अपचयित होता है और दूसरे का ऑक्सीकरण कराता है।


🔹 अपचायक (Reducing Agent)

✅ परिभाषा

वह पदार्थ जो इलेक्ट्रॉन त्यागता है या जिसका ऑक्सीकरण होता है,
उसे अपचायक कहते हैं।

➡️ अपचायक स्वयं ऑक्सीकृत होता है और दूसरे का अपचयन कराता है।


🔹 उदाहरण (बहुत महत्वपूर्ण 🔥)

CuSO₄ + Fe → FeSO₄ + Cu

यहाँ –

  • Fe → Fe²⁺ + 2e⁻ → Fe का ऑक्सीकरण → Fe = अपचायक

  • Cu²⁺ + 2e⁻ → Cu → Cu²⁺ का अपचयन → CuSO₄ = ऑक्सीकारक

👉 निष्कर्ष –
✔️ Fe = अपचायक
✔️ CuSO₄ (Cu²⁺) = ऑक्सीकारक


🔹 1.3.8 मंद एवं तीव्र अभिक्रियाएँ

(Slow and Fast Reactions)


⚡ तीव्र अभिक्रिया (Fast Reaction)

✅ परिभाषा

वे अभिक्रियाएँ जो बहुत कम समय (सेकंड के अंश) में पूरी हो जाती हैं,
उन्हें तीव्र अभिक्रियाएँ कहते हैं।

✨ उदाहरण

1️⃣ NaOH + HCl → NaCl + H₂O (10⁻¹⁰ सेकंड)
2️⃣ NaCl + AgNO₃ → NaNO₃ + AgCl ↓
3️⃣ NO₂ + NO₂ → N₂O₄ ↑ (10⁻⁶ सेकंड)


🐢 मंद अभिक्रिया (Slow Reaction)

✅ परिभाषा

वे अभिक्रियाएँ जिन्हें पूरा होने में मिनट, घंटे, दिन या वर्ष लगते हैं,
उन्हें मंद अभिक्रियाएँ कहते हैं।

✨ उदाहरण

1️⃣ CH₃COOH + C₂H₅OH → CH₃COOC₂H₅ + H₂O
(एसीटिक अम्ल + एथिल अल्कोहल → एथिल एसीटेट)

2️⃣ 4Fe + 3O₂ + 6H₂O → 2Fe₂O₃·3H₂O
➡️ लोहे पर जंग लगने की क्रिया (Rusting)


🔹 परीक्षा के लिए Important Points 🔥

⭐ जंग लगना = मंद अभिक्रिया
⭐ उदासीनीकरण (Acid + Base) = तीव्र अभिक्रिया
⭐ तीव्र अभिक्रिया प्रायः आयनों के बीच होती है
⭐ मंद अभिक्रियाएँ अधिक समय लेती हैं


🔹 1.4 उत्प्रेरक (Catalyst)

✅ परिभाषा

वह बाह्य पदार्थ जो स्वयं अपरिवर्तित रहते हुए
किसी रासायनिक अभिक्रिया की गति को बढ़ा या घटा देता है,
उसे उत्प्रेरक (Catalyst) कहते हैं।

👉 इस प्रक्रिया को उत्प्रेरण (Catalysis) कहते हैं।


🔥 उत्प्रेरक के गुण

✔️ स्वयं अभिक्रिया में नष्ट नहीं होता
✔️ अभिक्रिया की गति बदलता है
✔️ बहुत कम मात्रा में प्रभावी होता है
✔️ अंत में अपरिवर्तित रहता है


🧪 प्रयोग (Textbook वाला)

हाइड्रोजन परॉक्साइड (H₂O₂) में थोड़ा धोने का सोडा / MnO₂ डालने पर
तेजी से ऑक्सीजन निकलती है —
➡️ MnO₂ यहाँ उत्प्रेरक है।


🔹 Final One-liners (Exam Gold 🔥)

✔️ ऑक्सीकारक = इलेक्ट्रॉन ग्रहण करने वाला
✔️ अपचायक = इलेक्ट्रॉन त्यागने वाला
✔️ अपचायक स्वयं ऑक्सीकृत होता है
✔️ ऑक्सीकारक स्वयं अपचयित होता है
✔️ जंग लगना = मंद अभिक्रिया
✔️ उदासीनीकरण = तीव्र अभिक्रिया
✔️ उत्प्रेरक अभिक्रिया की गति बदलता है पर स्वयं नहीं बदलता


🔹 उत्प्रेरक का प्रयोग (Example – H₂O₂ अपघटन)

सामान्य अवस्था में हाइड्रोजन परॉक्साइड (H₂O₂) धीरे-धीरे टूटता है।
लेकिन जब इसमें KI (पोटैशियम आयोडाइड) मिलाते हैं तो –

🧪 अभिक्रिया –

2H₂O₂ —KI→ 2H₂O + O₂ ↑

➡️ KI की उपस्थिति में H₂O₂ तेजी से अपघटित होकर ऑक्सीजन गैस छोड़ता है
➡️ यहाँ KI = उत्प्रेरक


🔹 1.4.1 उत्प्रेरक के गुण (Properties of Catalyst)

⭐ बहुत महत्वपूर्ण बिंदु (Exam Gold 🔥)

1️⃣ उत्प्रेरक अभिक्रिया की गति बदलता है, पर स्वयं के द्रव्यमान या रासायनिक संघटन में कोई परिवर्तन नहीं होता।

2️⃣ उत्प्रेरक की बहुत थोड़ी मात्रा भी पर्याप्त होती है।

3️⃣ उत्प्रेरक क्रिया-विशिष्ट (Specific) होता है —
एक उत्प्रेरक केवल विशेष अभिक्रिया को ही प्रभावित करता है।

4️⃣ उत्प्रेरक अग्र एवं प्रतिगामी दोनों अभिक्रियाओं की गति को समान रूप से बढ़ाता है,
इससे साम्य शीघ्र स्थापित होता है, लेकिन साम्यावस्था नहीं बदलती।

5️⃣ उत्प्रेरक केवल गति बदल सकता है, अभिक्रिया को प्रारम्भ नहीं कर सकता।


🔹 1.4.2 उत्प्रेरकों के प्रकार

(Types of Catalysts)

उत्प्रेरक दो प्रकार के होते हैं –


🔥 (1) धनात्मक उत्प्रेरक (Positive Catalyst)

✅ परिभाषा

वे उत्प्रेरक जो रासायनिक अभिक्रिया की गति को बढ़ाते हैं,
उन्हें धनात्मक उत्प्रेरक कहते हैं।


🧪 उदाहरण –

(i) पोटैशियम क्लोरेट का अपघटन

2KClO₃ —MnO₂→ 2KCl + 3O₂

➡️ MnO₂ = धनात्मक उत्प्रेरक


(ii) अमोनिया का निर्माण (हैबर विधि)

N₂ + 3H₂ —Fe(Mo)→ 2NH₃

➡️ Fe (मोलिब्डेनम सहित) = धनात्मक उत्प्रेरक


(iii) H₂O₂ का अपघटन

KI या MnO₂ की उपस्थिति में अपघटन तेज हो जाता है।


❄️ (2) ऋणात्मक उत्प्रेरक (Negative Catalyst / Inhibitor)

✅ परिभाषा

वे उत्प्रेरक जो रासायनिक अभिक्रिया की गति को कम कर देते हैं,
उन्हें ऋणात्मक उत्प्रेरक या अवरोधक (Inhibitor) कहते हैं।


🧪 उदाहरण –

(i) ग्लिसरीन की उपस्थिति में –

2H₂O₂ —ग्लिसरीन→ 2H₂O + O₂

➡️ यहाँ ग्लिसरीन अपघटन की गति को कम करता है
➡️ ग्लिसरीन = ऋणात्मक उत्प्रेरक


(ii) क्लोरोफॉर्म का ऑक्सीकरण

2CHCl₃ + O₂ —C₂H₅OH→ 2COCl₂ + 2HCl

➡️ यहाँ एथिल अल्कोहल (C₂H₅OH) ऋणात्मक उत्प्रेरक है
➡️ यह क्लोरोफॉर्म के ऑक्सीकरण को धीमा करता है


🔹 परीक्षा के लिए Super Important One-liners 🔥

✔️ उत्प्रेरक स्वयं अभिक्रिया में नष्ट नहीं होता
✔️ उत्प्रेरक बहुत कम मात्रा में प्रभावी होता है
✔️ धनात्मक उत्प्रेरक गति बढ़ाता है
✔️ ऋणात्मक उत्प्रेरक गति घटाता है
✔️ उत्प्रेरक साम्यावस्था नहीं बदलता
✔️ उत्प्रेरक क्रिया-विशिष्ट होता है
✔️ ऋणात्मक उत्प्रेरक को अवरोधक (Inhibitor) भी कहते हैं


1.4.3 उत्प्रेरक की विशेष श्रेणियाँ (Catalyst Modifiers)

(3) स्वतः उत्प्रेरक (Autocatalyst): जब किसी अभिक्रिया में बना उत्पाद ही उसी अभिक्रिया की गति बढ़ा देता है, तो उसे स्वतः उत्प्रेरक कहते हैं। उदाहरण: CH₃COOC₂H₅ + H₂O → CH₃COOH + C₂H₅OH
(यहाँ बना एसीटिक अम्ल स्वयं उत्प्रेरक की तरह कार्य करता है)

(4) जैव उत्प्रेरक (Enzyme / Bio-catalyst): जीवों में होने वाली रासायनिक क्रियाओं की गति बढ़ाने वाले पदार्थ जैव उत्प्रेरक कहलाते हैं। उदाहरण (पाचन क्रिया): स्टार्च —(टायलीन)→ माल्टोज
माल्टोज —(माल्टेज)→ ग्लूकोज
ग्लूकोज —(जाइमेज)→ ऐल्कोहॉल


1.4.4 उत्प्रेरक की क्रियाशीलता को प्रभावित करने वाले पदार्थ

(1) उत्प्रेरक वर्धक (Promoter): वे पदार्थ जो उत्प्रेरक की क्रियाशीलता बढ़ाते हैं। उदाहरण: CO + 2H₂ —(ZnO, Cr₂O₃)→ CH₃OH
(ZnO उत्प्रेरक, Cr₂O₃ वर्धक)

(2) उत्प्रेरक विष (Poison): वे पदार्थ जिनकी उपस्थिति से उत्प्रेरक की क्रियाशीलता कम हो जाती है। उदाहरण: 2H₂O₂ —(Pt)→ 2H₂O + O₂
यदि HCN मिला दिया जाए तो प्लेटिनम की क्रियाशीलता घट जाती है।


1.4.5 भौतिक अवस्था के आधार पर उत्प्रेरण के प्रकार

(1) समांगी उत्प्रेरण (Homogeneous Catalysis): जब अभिकारक और उत्प्रेरक दोनों की भौतिक अवस्था समान हो। उदाहरण: अम्लीय माध्यम में एस्टरीकरण अभिक्रिया।


विषमांगी उत्प्रेरण (Heterogeneous Catalysis)

यदि अभिकारक और उत्प्रेरक की भौतिक अवस्था भिन्न हो तो ऐसी अभिक्रिया को विषमांगी उत्प्रेरण कहते हैं तथा उत्प्रेरक को विषमांगी उत्प्रेरक कहते हैं।

उदाहरण

  • 2SO₂(g) + O₂(g) → 2SO₃(g) (NO गैस उत्प्रेरक)

  • C₁₂H₂₂O₁₁ + H₂O —H₂SO₄→ C₆H₁₂O₆ + C₆H₁₂O₆ (शर्करा का जल अपघटन)

  • N₂(g) + 3H₂(g) —Fe(Mo)→ 2NH₃(g)

  • 4NH₃(g) + 5O₂(g) —Pt→ 4NO + 6H₂O

इन अभिक्रियाओं में अभिकारक गैसीय अवस्था में तथा उत्प्रेरक ठोस अवस्था में होता है।


महत्वपूर्ण बिंदु (Revision Points)

  1. भौतिक परिवर्तन में पदार्थ के भौतिक गुण बदलते हैं, परिवर्तन अस्थायी व उत्क्रमणीय होता है।

  2. रासायनिक परिवर्तन सामान्यतः स्थायी व अनुत्क्रमणीय होता है।

  3. संयोजन अभिक्रिया में दो या अधिक पदार्थ मिलकर एक नया पदार्थ बनाते हैं।

  4. विस्थापन अभिक्रिया में एक तत्व दूसरे को उसके यौगिक से विस्थापित करता है।

  5. द्विविस्थापन अभिक्रिया में दो यौगिकों के आयनों का परस्पर विनिमय होता है।

  6. अपघटन अभिक्रिया में एक यौगिक टूटकर दो या अधिक सरल पदार्थ बनाता है।

  7. उष्माक्षेपी अभिक्रिया में ऊष्मा उत्सर्जित होती है।

  8. उष्माशोषी अभिक्रिया – जिन अभिक्रियाओं में ऊष्मा का अवशोषण होता है, उन्हें उष्माशोषी अभिक्रिया कहते हैं।

    9. ऑक्सीकरण (Oxidation)

    • ऑक्सीजन का संयोग या हाइड्रोजन का त्याग।

    • ऋण विद्युत तत्व (electron) का त्याग।

    • इसे विलेय-इलेक्ट्रॉनीकरण भी कहते हैं।

    10. अपचयन (Reduction)

    • हाइड्रोजन का संयोग या ऑक्सीजन का त्याग।

    • इलेक्ट्रॉन का ग्रहण।

    • इसे इलेक्ट्रॉनीकरण भी कहते हैं।

    11. ऑक्सीकारक एवं अपचायक (Electronic theory के अनुसार)

    • जो पदार्थ इलेक्ट्रॉन ग्रहण करता है, वह ऑक्सीकारक कहलाता है।

    • जो पदार्थ इलेक्ट्रॉन त्याग करता है, वह अपचायक कहलाता है।

    12. अभिक्रिया की गति के आधार पर प्रकार

    • तीव्र अभिक्रिया

    • मंद अभिक्रिया

    13. उत्प्रेरक (Catalyst) – वह बाह्य पदार्थ जो स्वयं अपरिवर्तित रहते हुए अभिक्रिया की गति को बदल देता है, उत्प्रेरक कहलाता है। प्रकार –

    • धनात्मक उत्प्रेरक

    • ऋणात्मक उत्प्रेरक

    • स्वतः उत्प्रेरक

    • जैव उत्प्रेरक

    14. उत्प्रेरण (Catalysis) – उत्प्रेरक द्वारा अभिक्रिया की गति में परिवर्तन की प्रक्रिया को उत्प्रेरण कहते हैं। प्रकार –

    • समांगी उत्प्रेरण

    • विषमांगी उत्प्रेरण

    15. उत्प्रेरक वर्धक (Promoter) – वे पदार्थ जो उत्प्रेरक की क्रियाशीलता को बढ़ाते हैं, उत्प्रेरक वर्धक कहलाते हैं।

    16. उत्प्रेरक विष (Catalyst Poison) – वे पदार्थ जो उत्प्रेरक की क्रियाशीलता को कम कर देते हैं, उत्प्रेरक विष कहलाते हैं।


    अभ्यासार्थ प्रश्न – बहुविकल्पीय (हल सहित)

    प्रश्न 1. ओजोन अणुओं का ऑक्सीजन अणुओं में परिवर्तित होना किस प्रकार की अभिक्रिया है?

    • (क) विस्थापन

    • (ख) अपघटन ✅

    • (ग) संयोजन

    • (घ) उष्माशोषी

    सही उत्तर – (ख) अपघटन व्याख्या: एक यौगिक के टूटकर सरल अणुओं में बदलने की क्रिया अपघटन कहलाती है।


    प्रश्न 2. ऑक्सीकरण अभिक्रिया का उदाहरण है –

    • (क) Cl + e⁻ → Cl⁻

    • (ख) MnO₂ → Mn²⁺

    • (ग) Fe²⁺ → Fe³⁺ + e⁻ ✅

    • (घ) Cr₂O₇²⁻ → 2Cr³⁺

    सही उत्तर – (ग) व्याख्या: Fe²⁺ → Fe³⁺ + e⁻ में इलेक्ट्रॉन का त्याग हो रहा है, इसलिए यह ऑक्सीकरण है।


आनुवांशिकी (Genetics) // LDC// JR. ACCOUNTANT// RAS// REET, 3rd grade, 2nd grade, 1ST grade exam TOP 100 MCQS

Chapter 1 Genetics – 100 MCQ Test (REET / 2nd / 3rd Grade)

Chapter 1 – आनुवांशिकी (Genetics) : 100 MCQ Practice Test

REET / 2nd Grade / 3rd Grade Exam Pattern – With Answer & Explanation

आनुवांशिकी (Genetics) // LDC// JR. ACCOUNTANT// RAS// REET, 3rd grade, 2nd grade, 1ST grade exam

 

अध्याय 1 – आनुवांशिकी (Genetics)

1.1 परिचय (Introduction)

🔹 जीवन की उत्पत्ति

  • पृथ्वी पर जीवन का प्रारम्भ लगभग दो अरब वर्ष पूर्व माना जाता है।

  • जीवन एक निरन्तर चलने वाली प्रक्रिया है जो भूत, वर्तमान और भविष्य में जारी रहती है।

🔹 जातियों का विकास

  • समय के साथ पौधों और जन्तुओं की अनेक जातियाँ बनीं।

  • नई जातियों की उत्पत्ति तथा कुछ जातियों का विनाश निरन्तर होता रहता है।

🔹 प्रजनन और अस्तित्व

  • प्रत्येक जीव का जीवन सीमित होता है, परंतु वह प्रजनन द्वारा अपनी जाति को बनाए रखता है

  • जीव अपनी संतान के रूप में उत्तरजीविता (Survival) प्राप्त करता है।

🔹 निषेचन (Fertilization / Fusion)

  • नर व मादा युग्मकों के संलयन से युग्मज (Zygote) बनता है।

  • इसी से नया जीव विकसित होता है।

🔹 संतान में समानता और भिन्नता

  • संतान अपने माता-पिता से कई लक्षणों में समानता दिखाती है।

  • कुछ लक्षणों में भिन्नता भी पाई जाती है।

🔹 लक्षणों का संचरण (Transmission)

  • जनन के दौरान माता-पिता के लक्षण संतानों में स्थानांतरित होते हैं

  • इस प्रक्रिया को संचरण (Transmission) कहते हैं।

🔹 वंशागत लक्षण (Heredity / Inheritance)

  • जो लक्षण पीढ़ी दर पीढ़ी चलते हैं, उन्हें

    • वंशागत लक्षण (Heredity / Hereditary characters) कहते हैं।

    • इनके स्थानांतरण को वंशानुक्रमण (Inheritance) कहते हैं।

🔹 आनुवांशिकी की परिभाषा

  • जीवों में वंशानुक्रमण तथा लक्षणों के नियंत्रण का अध्ययन करने वाली शाखा को
    👉 आनुवांशिकी / आनुवांशिक विज्ञान (Genetics) कहते हैं।

🔹 हेरिडिटी (Heredity) और जेनेटिक्स (Genetics)

  • Heredity (हेरिडिटी) शब्द का निर्माण
    स्पेंसर (Spencer, 1863) ने किया।

  • Genetics (जेनेटिक्स) शब्द का प्रयोग
    बेटसन (Bateson, 1905) ने किया।

  • Genetics शब्द ग्रीक शब्द Gene से बना है, जिसका अर्थ है –
    👉 “to grow into” (विकसित होना)

  • यद्यपि Genetics शब्द 1905 में बना, परंतु इस विज्ञान की वास्तविक शुरुआत
    ग्रेगर मेंडल (Gregor Mendel) के कार्यों से हुई।

  • मेंडल ने 1857–1865 के बीच मटर के पौधों पर प्रयोग किए।

  • मेंडल के नियमों की पुनः खोज 1900 ई. में हुई।

👉 मेंडल को “आनुवांशिकी का जनक (Father of Genetics)” कहा जाता है।


🔹 1.2 आनुवांशिकी का संक्षिप्त इतिहास

(Brief History of Genetics)

  • आनुवांशिकी का जन्म औपचारिक रूप से 1900 ई. में माना जाता है।

  • परंतु मानव में वंशागति, लिंग, गुण व शारीरिक बनावट के विषय में अध्ययन
    👉 प्राचीन काल से ही होता आ रहा है।

  • आनुवांशिकी का इतिहास बहुत विस्तृत है, यहाँ प्रमुख योगदान दिए गए हैं:


🔹 प्रमुख ऐतिहासिक योगदान

1️⃣ 6000 B.C. (ईसा पूर्व) – बेबीलोन निवासी

  • घोड़ों की वंशावली (Pedigree) बनाने में निपुण थे।

  • संतान के गुणों की सही भविष्यवाणी करते थे।

2️⃣ 5000 B.C. – चीन

  • चयन एवं संकरण विधियों से
    👉 चावल की उन्नत किस्में विकसित की गईं।

3️⃣ 350 B.C. – अरस्तू (Aristotle)

  • बताया कि जनक पशुओं के बाल, सींग, खुरों के लक्षण संतानों में दिखाई देते हैं।

  • यह भी कहा कि कई बार बच्चे माता-पिता से अधिक
    👉 दादा-दादी / नाना-नानी से समानता दिखाते हैं।

4️⃣ लियोनार्डो दा विंची (1452–1519)

  • बताया कि संतान के निर्माण में
    👉 माता और पिता दोनों का समान योगदान होता है।

5️⃣ N. Grew (1682) और R. Camerarius (1694)

  • N. Grew (1682) – पौधों में जननांगों की उपस्थिति सिद्ध की।

  • R. Camerarius (1694) – पौधों में लैंगिक जनन का वर्णन किया।        

6️⃣ लैमार्क (J.B. Lamarck, 1744–1829)

  • सिद्धांत दिया कि
    👉 जीवनकाल में अर्जित लक्षण अगली पीढ़ी में वंशागत हो जाते हैं।

  • यह सिद्धांत आज के समय में
    मान्य नहीं है।


7️⃣ नाइट (Knight, 1799) और गॉस (Goss, 1824)

  • मेंडल से पहले मटर के पौधों (Pisum sativum) पर प्रयोग किए।

  • परंतु गणितीय विश्लेषण के अभाव में
    👉 कोई ठोस निष्कर्ष नहीं निकाल सके।


8️⃣ ग्रेगर जॉन मेंडल (Gregor Johann Mendel, 1822–1884)

  • 1857–1865 के बीच मटर पर संकरण प्रयोग किए।

  • 1865–66 में मेंडलवाद (Mendelism) का प्रतिपादन किया।

  • मेंडल के कार्यों का विस्तृत वर्णन आगे के अध्याय में है।

👉 मेंडल को आनुवांशिकी का जनक (Father of Genetics) कहा जाता है।


9️⃣ वाइसमैन (A. Weismann, 1834–1914)

  • जर्मप्लाज्म सिद्धांत (Theory of Germplasm) प्रस्तुत किया।

सिद्धांत के मुख्य बिंदु:

  • शरीर में दो प्रकार के प्लाज्म होते हैं –

    1. जर्मप्लाज्म (Germplasm) – जनन कोशिकाओं में पाया जाता है

    2. सोमैटोप्लाज्म (Somatoplasm) – कायिक कोशिकाओं में पाया जाता है

  • जर्मप्लाज्म में होने वाले परिवर्तन
    👉 वंशागत होते हैं

  • सोमैटोप्लाज्म में होने वाले परिवर्तन
    वंशागत नहीं होते

👉 इसी आधार पर लैमार्कवाद को असत्य सिद्ध किया गया।


🔟 सन 1900 – मेंडलवाद की पुनः खोज

तीन वैज्ञानिकों द्वारा स्वतंत्र रूप से की गई:

  • ह्यूगो डी व्रीज (Hugo de Vries) – हॉलैंड

  • कार्ल कोरेंस (Karl Correns) – जर्मनी

  • एरिक वॉन शेरमैक (Erick von Tschermak) – ऑस्ट्रिया

इन वैज्ञानिकों ने खोज की:

  • अपूर्ण प्रभाविता (Incomplete dominance)

  • सह-प्रभाविता (Co-dominance)

  • जीन अंतःक्रियाएँ (Gene interactions)


1️⃣1️⃣ कार्ल पियरसन (K. Pearson, 1900)

  • काई-वर्ग परीक्षण (Chi-square test) का विकास किया।

  • यह आनुवांशिकी में आँकड़ों के विश्लेषण के लिए उपयोगी है।


1️⃣2️⃣ सटन और बोवेरी (Sutton & Boveri, 1902)

  • गुणसूत्र सिद्धांत (Chromosomal Theory of Inheritance) का प्रतिपादन किया।

  • बताया कि जीन गुणसूत्रों पर स्थित होते हैं।


1️⃣3️⃣ बेटसन (W. Bateson, 1902–1909)

  • आनुवांशिकी से संबंधित कई महत्वपूर्ण शब्द गढ़े:

    • Genetics

    • Allelomorph (Allele)

    • Homozygote

    • Heterozygote

    • F₁, F₂ पीढ़ियाँ

1️⃣4️⃣ जोहान्सन (W. Johannsen, 1909)

  • महत्वपूर्ण शब्द दिए:

    • Phenotype (लक्षणप्रकट रूप)

    • Genotype (जीनप्रकट रूप / जीनरचना)

    • Gene (जीन)


1️⃣5️⃣ मॉर्गन (T. H. Morgan, 1910)

  • फल मक्खी (Drosophila) पर कार्य किया।

  • लिंग-सहलग्न (Sex-linked) लक्षणों की जानकारी दी।

  • जीन सिद्धांत (Gene theory) प्रस्तुत किया।

👉 इसके लिए मॉर्गन को 1933 में नोबेल पुरस्कार मिला।


1️⃣6️⃣ बीडल व टैटम (G. W. Beadle & E. L. Tatum, 1941)

  • न्यूरोस्पोरा कवक पर प्रयोग किए।

  • “एक जीन – एक एन्जाइम सिद्धांत (One gene–one enzyme theory)” दिया।

👉 इसके लिए 1958 में नोबेल पुरस्कार मिला।


1️⃣7️⃣ वाटसन व क्रिक (J. D. Watson & F. H. C. Crick, 1953)

  • डी.एन.ए. की संरचना का
    👉 द्वि-सूत्रीय कुंडलित मॉडल (Double stranded helical model) प्रस्तुत किया।

👉 इसके लिए 1962 में नोबेल पुरस्कार मिला।


1️⃣8️⃣ जैकब व मोनोड (F. Jacob & J. Monod, 1959)

  • ऑपेरॉन मॉडल (Operon model) प्रस्तुत किया।

  • यह जीन सक्रियता (Gene regulation) से संबंधित है।

👉 इसके लिए 1965 में नोबेल पुरस्कार मिला।


1️⃣9️⃣ प्रोजेक्ट ह्यूमन जीनोम (Project Human Genome – 1988)

  • निर्देशन: J. M. Watson

  • उद्देश्य:

    • मानव जीनों की पहचान करना

    • आनुवांशिक रोगों (Hereditary diseases) से मुक्ति दिलाना


🔹 1.3 आनुवांशिकी से संबंधित सामान्य शब्दावली

(General terminology related to Genetics)

🔹 भूमिका

  • मेंडल के प्रयोगों और नियमों को समझने के लिए
    👉 आनुवांशिकी की कुछ तकनीकी परिभाषाएँ जानना आवश्यक है।


1️⃣ जीन (Gene)

  • मेंडल के अनुसार जीवों के प्रत्येक लक्षण
    👉 कारकों (Factors) / निर्धारकों (Determiners) द्वारा नियंत्रित होते हैं।

  • ये कारक प्रत्येक कोशिका में बड़ी संख्या में पाए जाते हैं।

  • प्रत्येक लक्षण के लिए
    👉 कारकों का एक युग्म (Pair of factors) होता है।

🔹 1️⃣ जीन (Gene)

  • प्रत्येक लक्षण कारकों के एक जोड़े (One pair of factors) द्वारा नियंत्रित होता है।

  • इन कारकों को जोहान्सन (Johannsen, 1909) ने जीन (Gene) नाम दिया।

  • जीन DNA से बने होते हैं और गुणसूत्रों पर निश्चित क्रम में स्थित रहते हैं।

  • किसी जाति में जीनों की संख्या व संरचना निश्चित होती है।

  • जीन जीव के लक्षणों की अभिव्यक्ति तथा वंशागति के लिए उत्तरदायी होते हैं।


🔹 2️⃣ जीनोम / संजीन (Genome)

  • किसी जाति के अगुणित (Haploid) DNA की कुल मात्रा को जीनोम कहते हैं।

  • या – किसी जीव के युग्मक (Gamete) में उपस्थित जीनों का समुच्चय = जीनोम।

उदाहरण:

  • यदि किसी पौधे की देह कोशिका में 16 गुणसूत्र हैं
    👉 तो उसके परागकण (हैप्लॉइड) में 8 होंगे।

  • इस 8 की संख्या वाले DNA की कुल मात्रा = जीनोम

👉 सामान्यतः परागकण / युग्मक में हैप्लॉइड सेट होता है।


🔹 3️⃣ कैरियोटाइप (Karyotype)

  • किसी जीव या जाति के द्विगुणित गुणसूत्रों के समुच्चय (Set) को कैरियोटाइप कहते हैं।

  • इसमें गुणसूत्रों की आकारिकीय संरचना का अध्ययन किया जाता है।

उदाहरण:

  • मनुष्य में – 2n = 46 (23 जोड़े)

  • प्याज में – 2n = 16 (8 जोड़े)


🔹 कैरियोटाइप में अध्ययन किए जाने वाले बिंदु:

  1. गुणसूत्रों की संख्या

  2. गुणसूत्रों का आकार, लंबाई, व्यास

  3. प्राथमिक व द्वितीयक संकुचन तथा सैटेलाइट की स्थिति

  4. जीनों की संख्या / DNA की मात्रा

  5. भुजा अनुपात (Arm ratio)


🔹 इडियोग्राम (Idiogram)

  • कैरियोटाइप का वह रेखाचित्र जिसमें
    👉 गुणसूत्रों को आकार के घटते क्रम में दिखाया जाता है –
    उसे इडियोग्राम (Idiogram) कहते हैं।

  • विभिन्न जातियों के इडियोग्राम भिन्न-भिन्न होते हैं।


🔹 कैरियोटाइप का महत्व

  • आनुवांशिक रोगों के कारणों का पता लगाया जा सकता है।

  • असामान्यताओं की वंशागति तथा रोकथाम की जानकारी मिलती है।

उदाहरण:

  • डाउन सिंड्रोम (Down’s syndrome)
    👉 कारण – 21वें गुणसूत्र की त्रिगुणता (Trisomy 21)

🔹 चित्र 1.1 – सामान्य पुरुष एवं स्त्री का इडियोग्राम

  • इसमें मनुष्य के 23 जोड़े गुणसूत्र दिखाए गए हैं।

  • 22 जोड़े = अलिंग गुणसूत्र (Autosomes)

  • 1 जोड़ा = लिंग गुणसूत्र (Sex chromosomes)

लिंग निर्धारण:

  • पुरुष – XY

  • स्त्री – XX


🔹 4️⃣ अलिंग गुणसूत्र तथा लिंग गुणसूत्र

(Autosomes and Sex Chromosomes)

  • सभी प्राणियों में दो प्रकार के गुणसूत्र पाए जाते हैं –

    1. अलिंग गुणसूत्र (Autosomes)

    2. लिंग गुणसूत्र (Sex chromosomes)

  • एक केन्द्रक (न्यूक्लियस) के गुणसूत्रों में से
    👉 जो लिंग निर्धारण नहीं करते = अलिंग गुणसूत्र
    👉 जो लिंग निर्धारण करते = लिंग गुणसूत्र


🔹 अलिंग गुणसूत्र (Autosomes)

  • ये प्राणी के कायिक (शारीरिक) वंशागत लक्षणों के लिए उत्तरदायी होते हैं।

  • मनुष्य में कुल 23 जोड़े गुणसूत्र होते हैं –

    • 22 जोड़े = अलिंग गुणसूत्र (44)

    • 1 जोड़ा = लिंग गुणसूत्र (2)

उदाहरण:

  • मनुष्य:

    • 2n = 46 (कुल गुणसूत्र)

    • 2n – 2 = 46 – 2 = 44 अलिंग गुणसूत्र

  • प्याज:

    • 2n = 16

    • 2n – 2 = 16 – 2 = 14 अलिंग गुणसूत्र


🔹 लिंग गुणसूत्र (Sex Chromosomes)

  • सामान्यतः दो प्रकार के होते हैं –
    👉 X गुणसूत्र और Y गुणसूत्र

  • ये लिंग निर्धारण में सहायक होते हैं।

  • X और Y गुणसूत्र –

    • आकार में भिन्न होते हैं

    • आनुवांशिक संरचना भी भिन्न होती है

लिंग संयोजन:

  • XX = स्त्री

  • XY = पुरुष

🔹 X एवं Y गुणसूत्र (Sex chromosomes – आगे)

  • X गुणसूत्र आकार में बड़ा व सीधा होता है।

  • Y गुणसूत्र छोटा होता है तथा एक सिरे पर मुड़ा हुआ दिखाई देता है।

  • Y गुणसूत्र में DNA की मात्रा बहुत कम होती है, इसलिए इसे
    👉 आनुवांशिक दृष्टि से कम महत्वपूर्ण माना जाता है।

  • लिंग गुणसूत्रों के जोड़े को
    👉 विषमगुणसूत्र (Heterosome) कहते हैं, क्योंकि इनके दोनों सदस्य समान नहीं होते।


🔹 मनुष्य में लिंग निर्धारण

  • मनुष्य में –

    • 22 जोड़े = अलिंग गुणसूत्र

    • 1 जोड़ा = लिंग गुणसूत्र

संयोजन:

  • स्त्री – XX

  • पुरुष – XY

लिंग निर्धारण का नियम:

  • माता हमेशा X गुणसूत्र देती है।

  • पिता कभी X तो कभी Y देता है।

👉 यदि भ्रूण को पिता से X मिला → लड़की (XX)
👉 यदि भ्रूण को पिता से Y मिला → लड़का (XY)

➡️ अतः शिशु के लिंग का निर्धारण पिता करता है।


🔹 5️⃣ जीनप्ररूप एवं लक्षणप्ररूप

(Genotype and Phenotype)

🔹 जीनप्ररूप (Genotype)

  • किसी जीव में उपस्थित जीनों की आनुवांशिक संरचना = जीनप्ररूप।

  • इसका प्रयोग सबसे पहले
    👉 जोहान्सन (Johannson, 1909) ने किया।

  • जीनप्ररूप को प्रतीकों द्वारा दर्शाते हैं –

    • TT, Tt, tt

    • RR, Rr, rr

  • जीनप्ररूप बाह्य रूप पर निर्भर नहीं करता।

  • एक ही प्रकार के दिखाई देने वाले पौधों का
    👉 जीनप्ररूप भिन्न-भिन्न हो सकता है

उदाहरण:

  • लंबे पौधे का जीनप्ररूप – TT या Tt (दोनों हो सकते हैं)


🔹 लक्षणप्ररूप / फीनोटाइप (Phenotype)

  • किसी जीव का बाह्य दिखाई देने वाला रूप = लक्षणप्ररूप।

  • यह बताता है कि जीव कैसा दिखाई देता है

  • एक ही लक्षणप्ररूप के पीछे
    👉 जीनप्ररूप अलग-अलग हो सकते हैं।

  • लेकिन
    ❌ एक ही जीनप्ररूप के कई लक्षणप्ररूप नहीं हो सकते।


🔹 6️⃣ जन्मजात एवं अजन्मजात विशेषक

(Inherent and Non-inherent Traits)

  • विशेषक (Trait) का अर्थ = लक्षण / गुण

  • किसी जीव में पाए जाने वाले सभी लक्षण उसकी पहचान होते हैं।

🔹 जन्मजात विशेषक (Inherent traits)

  • जो लक्षण जन्म से होते हैं।

  • ये वंशागत (आनुवांशिक) होते हैं।

🔹 अजन्मजात विशेषक (Non-inherent traits)

  • जो लक्षण जीवन में बाद में विकसित होते हैं।

  • ये वंशागत नहीं होते।

उदाहरण:

  • कद लम्बा या ठिगना

  • बाल घुँघराले या सीधे

  • आँखों का रंग नीला या काला

➡️ आनुवांशिकी की भाषा में इन सभी को विशेषक (Traits) कहते हैं।

🔹 जन्मजात एवं अजन्मजात लक्षण (Inherent and Non-inherent traits)

  • किसी मनुष्य / प्राणी में पाए जाने वाले विशेषकों को दो भागों में बाँटा जाता है –

1️⃣ जन्मजात लक्षण (Inherent / Inherited traits)

  • जो लक्षण माता-पिता से प्राप्त होते हैं।

  • जो जन्म के समय से ही उपस्थित रहते हैं।

  • ये लक्षण अगली पीढ़ी में वंशागत होते हैं।

उदाहरण:

  • लंबा या ठिगना कद

  • आँखों का रंग (नीली, काली)

  • कुछ आनुवांशिक रोग –

    • सिकल सेल एनीमिया (Sickle cell anemia)

    • हीमोफीलिया (Haemophilia)

    • मंगोलिज्म / डाउन सिंड्रोम (Mongolism)


2️⃣ अजन्मजात लक्षण (Non-inherent / Acquired traits)

  • जो लक्षण व्यक्ति अपने जीवनकाल में स्वयं अर्जित करता है।

  • ये वंशागत नहीं होते (अगली पीढ़ी में नहीं जाते)।

उदाहरण:

  • चोट लगने से उत्पन्न लंगड़ापन

  • पहलवान का बलिष्ठ शरीर

  • अभ्यास से बने कौशल


🔹 7️⃣ युग्मविकल्पी (Allele / Allelomorph)

  • किसी एक गुण को नियंत्रित करने वाले जीन के
    👉 दो विपरीत रूप (Contrasting forms) = युग्मविकल्पी (Allele)

  • सामान्यतः प्रत्येक जीन के दो विकल्प होते हैं –

    1. प्रभावी (Dominant)

    2. अप्रभावी (Recessive)

लिखने का नियम:

  • प्रभावी जीन = बड़े अक्षर (Capital)

  • अप्रभावी जीन = छोटे अक्षर (Small)

उदाहरण:

  • लंबाई के लिए –

    • प्रभावी = T (Tall)

    • अप्रभावी = t (Dwarf)


🔹 8️⃣ समुग्मजी एवं विषमुग्मजी

(Homozygous and Heterozygous)

  • मेंडल के अनुसार प्रत्येक लक्षण
    👉 जीन के एक युग्म (Pair of genes) द्वारा नियंत्रित होता है।

  • ये जीन समजातीय गुणसूत्र युग्म (Homologous chromosome pair) पर स्थित होते हैं।


🔹 समुग्मजी (Homozygous)

  • जब किसी लक्षण के लिए दोनों जीन
    👉 समान (Identical) हों।

  • इसे शुद्ध (Pure) भी कहते हैं।

उदाहरण:

  • लंबा पौधा – TT

  • बौना पौधा – tt

  • गोल बीज – RR


🔹 विषमुग्मजी (Heterozygous)

  • जब किसी लक्षण के लिए दोनों जीन
    👉 असमान / विपरीत हों।

  • इसे अशुद्ध / संकर (Hybrid) भी कहते हैं।

उदाहरण:

  • लंबाई के लिए – Tt

  • गोल बीज के लिए – Rr

🔹 9️⃣ संकरण एवं संकर

(Hybridization and Hybrid)

  • जब दो विपरीत लक्षणों वाले समुग्मजी जनकों के बीच संकरण कराया जाता है →
    👉 उत्पन्न जीव = संकर (Hybrid)

  • इस पूरी प्रक्रिया को
    👉 संकरण (Hybridization) कहते हैं।


🔹 🔟 प्रभावी एवं अप्रभावी लक्षण

(Dominant and Recessive characters)

  • जो लक्षण F₁ पीढ़ी में प्रकट होता है
    👉 प्रभावी (Dominant) लक्षण

  • जो लक्षण F₁ पीढ़ी में प्रकट नहीं होता
    👉 अप्रभावी (Recessive) लक्षण


🔹 1️⃣1️⃣ प्रथम एवं द्वितीय संतान पीढ़ी

(First and Second filial generation)

  • जनकों के संकरण से उत्पन्न पहली पीढ़ी →
    👉 प्रथम संतान पीढ़ी (F₁)

  • F₁ के आपसी संकरण से उत्पन्न पीढ़ी →
    👉 द्वितीय संतान पीढ़ी (F₂)


🔹 1️⃣2️⃣ एकसंकर संकरण

(Monohybrid cross)

  • जब संकरण में केवल एक जोड़ी विपरीत लक्षणों को लिया जाए →
    👉 एकसंकर संकरण

उदाहरण:

  • पौधे की ऊँचाई – लंबा × बौना

  • F₂ पीढ़ी में लक्षणप्ररूप अनुपात =
    👉 3 : 1


🔹 1️⃣3️⃣ द्विसंकर संकरण

(Dihybrid cross)

  • जब संकरण में दो जोड़ी विपरीत लक्षणों को लिया जाए →
    👉 द्विसंकर संकरण

उदाहरण:

  • पौधे की लंबाई + फूल का रंग

  • F₂ पीढ़ी में लक्षणप्ररूप अनुपात =
    👉 9 : 3 : 3 : 1


🔹 महत्वपूर्ण बिंदु (Important Points)

1️⃣

  • जीवन की निरंतरता समझने के लिए
    👉 आनुवांशिकता (Heredity) तथा
    👉 आनुवांशिकी (Genetics) का अध्ययन किया जाता है।

2️⃣

  • जनक से संतान में लक्षणों के संचरण का अध्ययन =
    👉 आनुवांशिकता

  • इसके नियमों व विधियों का अध्ययन =
    👉 आनुवांशिकी

3️⃣

  • मेंडल के संकरण प्रयोगों से आनुवांशिकी की स्थापना हुई।
    👉 इसलिए मेंडल को
    “आनुवांशिकी का जनक (Father of Genetics)” कहा जाता है।

4️⃣

  • आनुवांशिकी के विकास में प्रमुख वैज्ञानिक –

    • जोहान्सन (1909)

    • मॉर्गन (1910)

    • बीडल एवं टैटम आदि

🔹 प्रमुख वैज्ञानिक योगदान

  • वाटसन एवं क्रिक (1953) – DNA संरचना

  • जैकब एवं मोनोड (1959) – ऑपेरॉन मॉडल
    👉 आनुवांशिकी के विकास में इनका महत्वपूर्ण योगदान है।


🔹 5️⃣ जीन (Gene)

  • मेंडल के कारकों को जोहान्सन ने “जीन” नाम दिया।

  • जीन DNA से बने होते हैं

  • जीन जीव के लक्षणों की
    👉 अभिव्यक्ति तथा वंशागति के लिए उत्तरदायी होते हैं।


🔹 6️⃣ जीनोम व कैरियोटाइप

  • किसी जीव के अगुणित गुणसूत्रों के सेट को →
    👉 जीनोम (Genome) कहते हैं।

  • किसी जीव के द्विगुणित गुणसूत्रों के सेट को →
    👉 कैरियोटाइप (Karyotype) कहते हैं।


🔹 7️⃣ जीनप्ररूप एवं लक्षणप्ररूप

  • किसी लक्षण के भौतिक (बाह्य) रूप =
    👉 लक्षणप्ररूप (Phenotype)

  • उस लक्षण को नियंत्रित करने वाले जीनों की रचना =
    👉 जीनप्ररूप (Genotype)


🔹 8️⃣ जन्मजात एवं अजन्मजात लक्षण

  • माता-पिता से प्राप्त लक्षण →
    👉 जन्मजात लक्षण (Inherited traits)

  • जीवन में अर्जित लक्षण →
    👉 अजन्मजात लक्षण (Acquired traits)


🔹 9️⃣ युग्मविकल्पी, समुग्मजी व विषमुग्मजी

  • एक लक्षण को नियंत्रित करने वाले जीनों के जोड़े →
    👉 युग्मविकल्पी (Allele)

  • दोनों जीन समान हों →
    👉 समुग्मजी (Homozygous)

  • दोनों जीन भिन्न हों →
    👉 विषमुग्मजी (Heterozygous)


🔹 🔟 संकरण एवं F₁ पीढ़ी

  • दो शुद्ध जनकों के संकरण से उत्पन्न संतान →
    👉 संकर (Hybrid)

  • उत्पन्न पहली पीढ़ी →
    👉 F₁ पीढ़ी (प्रथम संतान पीढ़ी)


🔹 अभ्यास के प्रश्न – महत्वपूर्ण उत्तर (Exam Help)

बहुविकल्पीय प्रश्नों के सही उत्तर:

1️⃣ जीन तथा जेनेटिक्स शब्द का उपयोग सर्वप्रथम किया था –
✔️ सही उत्तर: (घ) जोहान्सन एवं बेटसन

2️⃣ लक्षणों को नियंत्रित करने वाली आधुनिक इकाई कहलाती है –
✔️ सही उत्तर: (घ) उपर्युक्त सभी

3️⃣ जीव के अगुणित गुणसूत्रों के सेट या जीनों को कहते हैं –
✔️ सही उत्तर: (क) जीनोम

4️⃣ मनुष्य के एक कैरियोटाइप में अलिंग गुणसूत्रों की संख्या –
✔️ सही उत्तर: (ख) 44


अति लघु उत्तर:

5️⃣ आनुवांशिकी के जनक किसे कहा जाता है?
👉 उत्तर: ग्रेगर जॉन मेंडल (Gregor Mendel)

1. “Genetics” शब्द का प्रयोग सर्वप्रथम किसने किया?
A. स्पेंसर
B. मेंडल
C. बेटसन
D. जोहान्सन
✔️ उत्तर: C. बेटसन


2. आनुवांशिकी के जनक किसे कहा जाता है?
A. वाइसमैन
B. अरस्तू
C. मॉर्गन
D. ग्रेगर मेंडल
✔️ उत्तर: D. ग्रेगर मेंडल


3. मनुष्य में अलिंग गुणसूत्रों की संख्या कितनी होती है?
A. 22
B. 23
C. 44
D. 46
✔️ उत्तर: C. 44


4. जीन का निर्माण किससे होता है?
A. RNA
B. प्रोटीन
C. DNA
D. लिपिड
✔️ उत्तर: C. DNA


5. F₂ पीढ़ी में एकसंकर संकरण का अनुपात होता है –
A. 1 : 1
B. 2 : 1
C. 3 : 1
D. 9 : 3 : 3 : 1
✔️ उत्तर: C. 3 : 1


6. द्विसंकर संकरण में F₂ पीढ़ी का अनुपात होता है –
A. 3 : 1
B. 1 : 2 : 1
C. 9 : 3 : 3 : 1
D. 2 : 1
✔️ उत्तर: C. 9 : 3 : 3 : 1


7. जीनप्ररूप (Genotype) शब्द का प्रयोग किसने किया?
A. बेटसन
B. जोहान्सन
C. मॉर्गन
D. वाइसमैन
✔️ उत्तर: B. जोहान्सन


8. स्त्री का लिंग गुणसूत्र संयोजन होता है –
A. XY
B. YY
C. XX
D. XO
✔️ उत्तर: C. XX


9. Y गुणसूत्र में DNA की मात्रा होती है –
A. अधिक
B. सामान्य
C. बहुत अधिक
D. बहुत कम
✔️ उत्तर: D. बहुत कम


10. Chi-square test का विकास किसने किया?
A. मेंडल
B. मॉर्गन
C. पियरसन
D. क्रिक
✔️ उत्तर: C. पियरसन


✍️ भाग – 2 : Short Questions (लघु उत्तरीय प्रश्न)

1. आनुवांशिकी (Genetics) क्या है?
उत्तर: वह विज्ञान जिसमें जनकों से संतानों में लक्षणों के संचरण का अध्ययन किया जाता है।


2. जीन (Gene) की परिभाषा दीजिए।
उत्तर: लक्षणों को नियंत्रित करने वाली DNA से बनी इकाई को जीन कहते हैं।


3. जीनोम किसे कहते हैं?
उत्तर: किसी जीव के अगुणित गुणसूत्रों के पूरे सेट को जीनोम कहते हैं।


4. कैरियोटाइप क्या है?
उत्तर: किसी जीव के द्विगुणित गुणसूत्रों के समुच्चय को कैरियोटाइप कहते हैं।


5. समुग्मजी किसे कहते हैं?
उत्तर: जब किसी लक्षण के दोनों जीन समान हों तो उसे समुग्मजी कहते हैं।


6. विषमुग्मजी की परिभाषा लिखिए।
उत्तर: जब किसी लक्षण के दोनों जीन भिन्न हों तो उसे विषमुग्मजी कहते हैं।


7. जन्मजात लक्षण क्या होते हैं?
उत्तर: जो लक्षण माता-पिता से प्राप्त होकर जन्म से उपस्थित होते हैं।


8. अजन्मजात लक्षण क्या होते हैं?
उत्तर: जो लक्षण जीवन में अर्जित होते हैं और वंशागत नहीं होते।


9. प्रभावी लक्षण क्या है?
उत्तर: जो लक्षण F₁ पीढ़ी में प्रकट होता है।


10. लिंग निर्धारण कौन करता है – माता या पिता?
उत्तर: पिता लिंग निर्धारण करता है।


⚡ भाग – 3 : One-liners (एक पंक्ति में उत्तर)

🔹 आनुवांशिकी के जनक – ग्रेगर जॉन मेंडल
🔹 “Heredity” शब्द – स्पेंसर (1863)
🔹 “Genetics” शब्द – बेटसन (1905)
🔹 जीन शब्द दिया – जोहान्सन
🔹 मनुष्य के कुल गुणसूत्र – 46
🔹 अलिंग गुणसूत्र – 44
🔹 लिंग गुणसूत्र – 2
🔹 पुरुष का संयोजन – XY
🔹 स्त्री का संयोजन – XX
🔹 जर्मप्लाज्म सिद्धांत – वाइसमैन
🔹 One gene–one enzyme – बीडल व टैटम
🔹 DNA मॉडल – वाटसन व क्रिक
🔹 Operon model – जैकब व मोनोड
🔹 Monohybrid अनुपात – 3 : 1
🔹 Dihybrid अनुपात – 9 : 3 : 3 : 1

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