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शनिवार, 21 दिसंबर 2024

दादूदयाल|| REET LEVEL II

दादूदयाल

👉 'राजस्थान के कबीर दादूदयाल का जन्म अहमदाबाद (गुजरात) में फाल्गुन शुक्ल अष्टमी 1544 ई. का माना जाता है। 

👉 बुड्ढ़न (वृद्धानन्द) नामक संत से दीक्षा ग्रहण करके दादू, 1568 ई. में सांभर आकर रहने लगे तथा धुनिया का कार्य आरम्भ कर दिया। यहाँ से दादू ने उपदेश देना आरम्भ किया।

👉 1575 ई. में दादू अपने 25 शिष्यों के साथ आमेर चले आये। जहाँ अगले 14 वर्षों तक इन्होंने निवास किया। 

👉 दादू ने 1585 ई. में मुगल सम्राट अकबर से भेंट करने हेतु फतेहपुर सीकरी की यात्रा भी की थी।

👉 दादू तत्कालीन ढूंढाड़ और मारवाड़ राज्यों में यात्रा करते व उपदेश देते हुए 1602 ई. में फुलेरा के समीपवर्ती ग्राम नरायणा में आ गये और यहीं ज्येष्ठ कृष्ण अष्टमी 1603 ई. को इन्होंने देह त्याग किया। 

👉 दादू के पार्थिव शरीर को उनके निर्देशानुसार ही समीपस्थ 'भेराणा की पहाड़ी‘ के नीचे दादू खोल नामक स्थान पर रख दिया गया था। दादू-पंथी इस स्थान को अत्यन्त पवित्र मानते हैं।

👉 दादू ने ब्रह्म, जीव, जगत और मोक्ष पर अपने उपदेश सरल भाषा (सधुक्कड़ी) में दिए।

👉 दादूजी की वाणी तथा दादू रा दूहा नामक ग्रंथों में दादू के उपदेश और विचार मिलते हैं। 

👉 गरीबदास, मिस्किनदास सुन्दरदास, बखनाजी, रज्जब, माघोदास आदि दादू के प्रसिद्ध शिष्य थे।

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तुर्रा कलंगी ख्याल|| REET LEVEL II

तुर्रा कलंगी ख्याल
👉🏿 मेवाड़ के शाह अली और तुकनगीर नामक संत पीरों ने 400 वर्ष पूर्व तुर्रा कलंगी की रचना की। 
👉🏿 'तुर्रा' को 'शिव' और 'कलंगी' को 'पार्वती' का प्रतीक माना जाता है। 
👉🏿 तुकनगीर 'तुर्रा' के तथा शाह अली 'कलंगी' के पक्षकार थे। 
👉🏿 इनके शिव-शक्ति संबंधी विचारों को लोगों तक पहुंचाने का मुख्य माध्यम काव्यमय रचनाएं थीं, जिन्हें 'दंगल' के नाम से जानते हैं। 
👉🏿 इसके संवादों को 'बोल' कहते हैं और ये काव्यत्मक होते हैं। 
👉🏿 तुर्रा कलंगी के सर्वप्रथम खेले गए ख्याल का नाम 'तुर्रा कलंगी का ख्याल' था। 
👉🏿 इसकी प्रकृति गैर व्यावसायिक है। 
👉🏿 इसमें 20 फुट ऊँचा रंगमंच बनाकर उसकी राजस्थानी शैली में भरपूर सजावट की जाती है। 
👉🏿 इसमें चंग बजाया जाता है।
👉🏿 इस ख्याल के मुख्य केन्द्र घोसूण्डा, चित्तौड़, निम्बाहेडा़ तथा नीमच (मध्य प्रदेश) हैं। 
👉🏿 इन स्थानों पर इस ख्याल के सर्वश्रेष्ठ कलाकार सोनी जयदयाल, चेतराम, हमीद बेग, ताराचंद तथा ठाकुर ओंकारसिंह आदि हैं।

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नोह सभ्यता – भरतपुर REET LEVEL II SST

नोह सभ्यता – भरतपुर
👉🏿 वर्ष 1963-64 में रतनचंद्र अग्रवाल के निर्देशन में यहाँ पर उत्खनन कार्य किया गया।
👉🏿 रेडियो कार्बन तिथि के अनुसार इस सभ्यता का समय 1100 ई.पू. से 900 ई.पू. माना जाता है।
👉🏿 यहाँ से उत्खनन में विशालकाय यक्ष प्रतिमा तथा मौर्यकालीन पॉलिश युक्त चुनार के चिकने पत्थर से टुकड़े प्राप्त हुए हैं।
👉🏿 यहाँ से प्राप्त एक पात्र पर ब्राह्मी लिपि में लेख अंकित है।
👉🏿 यह एक लौहयुगीन सभ्यता है तथा यहाँ से प्राप्त भांड काले तथा लाल वेयर युक्त है।
👉🏿 यहाँ पर एक ही स्थान से 16 रिंगवेल प्राप्त हुए हैं।
👉🏿 यहाँ से 5 सांस्कृतिक युगों के अवशेष मिले हैं।
👉🏿 यहाँ से लौहे के कृषि संबंधी उपकरण एवं चक्रकूपों के अवशेष प्राप्त हुए हैं।
👉🏿 यहाँ के निवासी मकान बनाने के लिए पक्की ईंटों का प्रयोग करते थे।
👉🏿 यहाँ से कुषाण नरेश हुविस्क एवं वासुदेव के सिक्के प्राप्त हुए है।
👉🏿 नोह से ताम्र युगीन, आर्य युगीन एवं महाभारत कालीन सभ्यता के अवशेष प्राप्त हुए हैं।


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जुनागढ बीकानेर|| Junagarh Fort, Bikaner

 जूनागढ़ बीकानेर// Junagarh Fort, Bikaner// 





👉🏿 जूनागढ़ दुर्गराजस्थान के बीकानेर में स्थित है।

 👉🏿उत्तरी राजस्थान में मरुस्थल से घिरा यह किला धान्वन दुर्ग की कोटि में आता है। लाल पत्थरों से बने इस भव्य किले का निर्माण बीकानेर के प्रतापी शासक रायसिंह ने करवाया था जो मुगल बादशाह अकबर और फिर जहांगीर का प्रमुख एवं विश्वस्त मनसबदार था।

👉🏿 पुराने गढ़ की नींव तो पहले बीकानेर के यशस्वी संस्थापक राव बीकाजी ने वि. संवत् 1542 (1485 ई.) में रखी थी। उनके द्वारा निर्मित प्राचीन किला नगर प्राचीर के भीतर दक्षिण पश्चिम में एक ऊंची चट्टान पर विद्यमान है जो ‘बीकाजी की टेकरी‘ कहलाती है।

👉🏿 दयालदास की ख्यात में लिखा है कि नये गढ़ की नींव मौजुदा पुराने गढ़ के स्थान पर ही भरी गयी थी, अतः संभव है इसी कारण इसे जूनागढ़ कहा गया।

👉🏿 बीकानेर के किले के प्रवेश द्वार पर उत्कीर्ण दुर्ग निर्माता महाराजा रायसिंह की प्रशस्ति के अनुसार इस किले की नींव विक्रम संवत् 1645 की फागुन सुदी 12 को रखी गयी।

👉🏿 बीकानेर नरेश जोरावरसिंह के समय जोधपुर के राजा अभयसिंह ने बीकानेर पर आक्रमण करने की योजना बनाई तब जोरावरसिंह ने जयपुर नरेश सवाई जयसिंह को सहायता हेतु पत्र लिखा-

        अभो ग्राह बीकाण गज, मारु समद अथाह
        गरुड़ छाँड़ गोविन्द ज्यूँ, सहाय करो जयशाह

👉🏿 उसी संकट के समय महाराजा जोरावरसिंह ने एक सफेद चील को देखकर अपनी कुलदेवी करणीजी को बड़े मार्मिक शब्दों में याद किया-

        डाढ़ाली डोकर थई, का तूँ गई विदेस।
        खून बिना क्यों खोसजे, निज बीका रो देस।।

👉🏿 जूनागढ़ दुर्ग चतुष्कोण या चतुर्भुजाकृति का है। यह दुर्ग ‘जमीन का जेवर‘ उपनाम से भी प्रसिद्ध है।

👉🏿 दुर्ग के भीतर जाने हेतु दो प्रमुख प्रवेश द्वार हैं- कर्णपोल, चाँदपोल किले के निर्माण के समय उसका विस्तार सूरजपोल तक ही था। इसी पोल पर किले के निर्माता रायसिंह की प्रशस्ति उत्कीर्ण है।

👉🏿 इसी दुर्ग के अन्दर सूरजपोल में 1567 ई. के चित्तौड़ के साके के समय वीरगति को पाने वाले दो इतिहास प्रसिद्ध वीरों जयमल मेड़तिया और उनके बहनोई आमेट के रावत पत्ता सिसोदिया की गजारुढ़ मूर्तियाँ स्थापित है। ऐसी ही मूर्तियां बादशाह अकबर ने आगरा के किले के प्रवेश द्वार पर लगवाई।

👉🏿 जूनागढ़ में बने प्रमुख महल- रायसिंह का चौबारा, फूल महल, चन्द्र महल, गज मंदिर, अनूप महल, रतन निवास, रंग महल, कर्ण महल, दलेल निवास, छत्र महल, लाल निवास, सरदार निवास, गंगा निवास, चीनी बुर्ज, सुनहरी बुर्ज, विक्रम विलास, सूरत निवास, मोती महल, कुंवरपदा और जालीदार बारहदरियाँ प्रमुख एवं उल्लेखनीय है।

👉🏿 बीकानेर के राजाओं का राज तिलक अनूप महल में होता था। दुर्ग के भीतर जलापूर्ति के लिए रामसर और रानीसर दो अथाह जलराशि वाले कुएं उल्लेखनीय हैं।

👉🏿 जूनागढ़ की एक प्रमुख विशेषता यह है कि इसके प्रांगण में दुर्लभ प्राचीन वस्तुओं, शस्त्रास्त्रों, देव प्रतिमाओं, विविध प्रकार के पागों तथा फारसी व संस्कृत में लिखे गये हस्तलिखित ग्रन्थों का बहुत समृद्ध संग्रहालय है।

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EVS {पर्यावरण} Notes PDF || Reet Level-1 || Handwritten Notes In Hindi || REET-2024

 नमस्कार प्यारे दोस्तों, आप सभी का Rajasthan geographay पर स्वागत है। हम आपके साथ   Environment (पर्यावरण ) PDF  शेयर कर रहे है।  यह पीडीऍफ़ आपको विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए काम आएगी।  जैसे :- REET ,CTET इत्यादि।

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Rajasthan Politics Notes in Hindi || RAJASTHAN POLITY// राजस्थान राजव्यवस्था हस्तलिखित नोट्स

 

Rajasthan Political Notes in Hindi pdf// RAJASTHAN PATWARI// VDO// RAJASTHAN POLICE// THIRD GRADE TEACHER// REET MAINS// SECOND GRADE TEACHER// FIRST GRADE TEACHER// 4TH GRADE TEACHER// RSMSSB// RPSC// RSSB//

Topic :-

राज्य की कार्यपालिका

राज्यपाल

मुख्यमंत्री

राज्य मंत्री परिषद

राज्य विधानमंडल

सचिवालय

मुख्य सचिव

संभाग

जिला

उपखण्ड अधिकारी

तहसीलदार व पटवारी

राज्य निर्वाचन आयोग

राजस्थान लोक सेवा आयोग RPSC

राज्य मानवाधिकार आयोग

राज्य सूचना आयोग

स्थानीय स्वशासन

नगरीय संस्थाएँ

Medium – Hindi

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Syllabus –

● Reet L2 SST के लिए प्रश्न बैंक 10000+ प्रश्न-उतर

• भारतीय सभ्यता, संस्कृति एवं समाज – सिंधु घाटी सभ्यता, वैदिक संस्कृति, भारतीय समाज: विशेषताएँ, परिवार, विवाह, लैंगिक संवेदनशीलता, ग्रामीण जीवन एवं शहरीकरण।

• मौर्य तथा गुप्त साम्राज्य एवं गुप्तोत्तर काल – राजनीतिक इतिहास और प्रशासन, भारतीय संस्कृति के प्रति योगदान, गुप्तकाल की सांस्कृतिक उपलब्धियां, भारत (600-1000 ईस्वी), बाहरी विश्व से भारत का सम्बंध।

• मध्यकाल एवं आधुनिक काल – भक्ति और सूफी आंदोलन, मुगल-राजपूत सम्बन्ध, मुगल प्रशासन, मध्यकालीन सामाजिक, आर्थिक एवं सांस्कृतिक दशा, भारतीय राज्यों के प्रति ब्रिटिश नीति, 1857 की क्रांति, भारतीय अर्थव्यवस्था पर ब्रिटिश प्रभाव, पुर्नजागरण एवं सामाजिक सुधार, भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन (1919-1947)।

• भारतीय संविधान एवं लोकतंत्र – उद्देशिका, मूल अधिकार एवं मूल कर्तव्य, धर्म निरपेक्षता एवं सामाजिक न्याय।

• सरकार : गठन एवं कार्य – संसद; राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री एवं मंत्रिपरिषद, उच्चतम न्यायालय; राज्य सरकार, पंचायती राज एवं नगरीय स्व-शासन।

• पृथ्वी के प्रमुख घटक – स्थलमंडल, जलमंडल, वायुमण्डल, जैवमंडल, चट्टानों के प्रकार, पृथ्वी की सतह पर परिवर्तनकारी आंतरिक एवं बाहय शक्तियाँ।

• संसाधन एवं विकास – संसाधनों के प्रकार, संसाधन संरक्षण, मृदा, खनिज और ऊर्जा संसाधन, कृषि, उद्योग एवं मानव संसाधन।

• भारत का भूगोल एवं संसाधन – भू- आकृति प्रदेश, जलवायु, प्राकृतिक वनस्पति, वन्य जीवन, बहुद्देश्यीय योजनाएं, कृषि फसलें, उद्योग, परिवहन, जनसंख्या, जनसुविधाएं, विकास के आर्थिक एवं सामाजिक कार्यक्रम, उपभोक्ता-जागृति।

• राजस्थान का भूगोल एवं संसाधन – भौतिक प्रदेश, जल संरक्षण एवं संग्रहण, कृषि फसलें, खनिज एवं ऊर्जा संसाधन, परिवहन, उद्योग एवं जनसंख्या।

• राजस्थान का इतिहास एवं संस्कृति – प्राचीन सभ्यता एवं जनपद, राजस्थान में स्वतंत्रता आंदोलन, राजस्थान का एकीकरण, राजस्थान की विरासत एवं संस्कृति (किले, महल, मेले, त्योहार, लोक कलाएं, हस्त कलाएं), राजस्थानी साहित्य, पर्यटन, विरासत का संरक्षण।

• शिक्षाशास्रीय मुद्दे – I, शिक्षाशास्रीय मुद्दे – II


Notes (Old Syllabus Wise) –

• भारतीय सभ्यता, संस्कृति व समाज – Download pdf

• मौर्य एवं गुप्त साम्राज्य व गुप्तोत्तर काल – Download pdf

• मध्यकाल एवं आधुनिक काल – Download pdf

• भारतीय संविधान एवं लोकतंत्र – Download pdf

• सरकार : गठन एवं कार्य – Download pdf

• पृथ्वी के प्रमुख घटक – Download pdf

• संसाधन एवं विकास – Download pdf

• भारत का भूगोल एवं संसाधन – Download pdf

• राजस्थान का भूगोल एवं संसाधन – Download pdf

• राजस्थान का इतिहास एवं संस्कृति – Download pdf (Part 1), Download pdf (Part 2)

• शिक्षाशास्रीय मुद्दे – I, शिक्षाशास्रीय मुद्दे – II – Download pdf

शिक्षण विधि के महत्वपूर्ण नोट्स || Teaching Methods Notes || Handwritten Notes

 शिक्षण विधि के महत्वपूर्ण नोट्स || Teaching Methods // REET Level-1 // REET LEVEL-II // REET MAINS 2025/ REET MAINS 2026/ REET MAINS/ 3RD GRADE TEACHER// THIRD GRADE TEACHER

आपको इस pdf file में शिक्षण विधि सम्बन्धी नोट्स मिलते है। इस नोट्स की भाषा शैली अत्यंत सरल है। यह नोट्स के द्वारा आप Reet व अन्य परीक्षाओं की तैयारी कर सकते है। इस नोट्स में कौन-कौनसी शिक्षण विधियाँ मिलती है वह सभी शिक्षण विधियाँ को नीचे दर्शाया गया है। आप इस नोट्स की pdf file को डाऊनलोड करके इन नोट्स का प्रिंट निकाल सकते है।

Topic:

• दल शिक्षण विधि / टोली शिक्षण विधि (Team Teaching Method)

• सूक्ष्म शिक्षण विधि (Micro Teaching)

• बुनियादी शिक्षा विधि (Besic Education Method)

• प्रयोजन विधि (Project Method)

• मॉटेसरी विधि

• बिनेटिक विधि

• ड्रेकाली विधि

• वाचन विधि

• पठन कौशल विधि

• व्याकरण अनुवाद विधि / भंडारकर विधि

• भाषा प्रयोगशाला विधि

• पर्यवेशित अध्ययन विधि

• भाषा यन्त्र उपकरण विधि

• अभिक्रमित अनुदेशन विधि

• आगमनात्मक व निगमनात्मक विधि

• व्याख्यान विधि / प्रवचन विधि


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पर्यावरण अध्ययन हस्तलिखित नोट्स || REET Level-1

 पर्यावरण अध्ययन हस्तलिखित नोट्स || REET Level-1 // REET MAINS 2025/ REET MAINS 2026/ REET MAINS/ 3RD GRADE TEACHER// THIRD GRADE TEACHER


Topic:

  • परिवार (Family)
  • परिवार की प्रमुख विशेषताएँ
  • परिवार की उत्तप्ति
  • परिवार के प्रकार
  • परिवार में आपसी संबन्ध
  • सामाजिक बुराईयां (बाल विवाह, दहेज प्रथा, चोरी, बालश्रम, नशाखोरी)
  • वस्त्र एवं वस्त्रों का प्रकार

  अध्याय 2 : मेंडेलियन आनुवंशिकी (Mendelian Genetics) 2.1 परिचय (Introduction) आनुवंशिकी के क्षेत्र में प्रथम सफल प्रयोग तथा वंशागति के नियम...