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गुरुवार, 4 दिसंबर 2025

राजस्थान की क्षेत्रीय बोलियाँ - महत्वपूर्ण Notes

राजस्थान की क्षेत्रीय बोलियाँ – संपूर्ण Notes

राजस्थान की प्रतिस्पर्धी परीक्षाएँ: REET, RPSC, Patwari, VDO, 3rd Grade, CET आदि के लिए उपयोगी
महत्वपूर्ण: राजस्थानी भाषा भारतीय आर्य भाषा परिवार की पश्चिमी उपशाखा की प्रमुख भाषा है। इसकी अलग–अलग क्षेत्रीय बोलियाँ राजस्थान के विभिन्न भौगोलिक, सांस्कृतिक एवं ऐतिहासिक क्षेत्रों से सम्बन्धित हैं।

1. राजस्थानी भाषा का संक्षिप्त परिचय

▪ राजस्थानी भाषा न्यू–इंडो–आर्यन (New Indo-Aryan) समूह की भाषा मानी जाती है।
▪ इसे कभी–कभी पश्चिमी हिंदी समूह की उपभाषा भी कहा जाता है, परन्तु अधिकांश विद्वान इसे एक अलग स्वतंत्र भाषा मानते हैं।
▪ मध्यकालीन राजस्थानी को प्रायः डिंगल (वीर रस प्रधान काव्य) और पिंगल (श्रृंगार/भक्ति आदि) नामों से भी जाना गया।
▪ राजस्थानी की बोलियों में शब्दावली, उच्चारण, वाक्य–रचना एवं ध्वनि–वैशिष्ट्य में अंतर पाया जाता है, परन्तु इन सबकी मूल भाषा–संरचना समान है।

2. राजस्थान की प्रमुख क्षेत्रीय बोलियाँ

मुख्य बोलियाँ (Exam Point of View)

  • मारवाड़ी
  • मेवाड़ी
  • ढूँढाड़ी
  • हाड़ौती
  • मेवाती
  • शेखावाटी
  • बागड़ी
  • वागड़ी
  • गोड़वाड़ी (कभी–कभी अलग से)
बोली मुख्य क्षेत्र / जिले संक्षिप्त विशेषता (Exam Hint)
मारवाड़ी जोधपुर, जैसलमेर, बाड़मेर, नागौर, पाली, जालौर, सिरोही आदि सबसे व्यापक बोली; अकसर पूरी राजस्थानी के लिए भी “मारवाड़ी” शब्द उपयोग कर लेते हैं।
मेवाड़ी उदयपुर, राजसमंद, चित्तौड़गढ़, भीलवाड़ा के भाग मेवाड़ क्षेत्र की बोली; कई राजस्थानी साहित्यकार यहीं से।
ढूँढाड़ी जयपुर, टोंक, दौसा, सवाईमाधोपुर (ढूँढाड़ क्षेत्र) जयपुर राज्य की पारम्परिक राजभाषा–सम्बद्ध बोली मानी जाती है।
हाड़ौती कोटा, बूंदी, झालावाड़, बारां हाड़ौती अंचल की बोली; शिक्षा, साहित्य में खूब प्रयुक्त।
मेवाती अलवर, भरतपुर के मेवात क्षेत्र के भाग मेव समुदाय से जुड़ी; ब्रज तथा हरियाणवी से मिलते–जुलते तत्व।
शेखावाटी सीकर, झुंझुनूं, चुरू के कुछ भाग कड़े उच्चारण, विशिष्ट शब्दावली; लोकगीतों के लिए प्रसिद्ध।
बागड़ी श्रीगंगानगर, हनुमानगढ़, उत्तरी बीकानेर राजस्थान–हरियाणा–पंजाब की सीमा पर बोली; इसीलिए मिश्रित स्वरूप।
वागड़ी बांसवाड़ा, डूंगरपुर, प्रतापगढ़ के आदिवासी क्षेत्र भील–बहुल क्षेत्र की बोली; कई स्थानों पर गुजराती व भीली प्रभाव।
गोड़वाड़ी पाली, सिरोही, उदयपुर का सीमावर्ती भाग (आबू रोड इत्यादि) मारवाड़ी और मेवाड़ी से मिलती–जुलती; स्थानीय स्तर पर अलग बोली मानी जाती है।

3. बोलियों के आधार – भौगोलिक एवं ऐतिहासिक

▪ राजस्थान में बोलियों का गठन मुख्यतः पुराने रियासत क्षेत्रों, भौगोलिक सीमाओं (मरुभूमि, अरावली, पठार) और जनजातीय–समुदायिक बसावट के आधार पर हुआ।
▪ जैसे – मेवाड़, मारवाड़, ढूँढाड़, हाड़ौती, शेखावाटी, वागड़, बांगड़, मेवात आदि ऐतिहासिक–भौगोलिक क्षेत्रों के नामों पर ही बोलियों के नाम प्रचलित हुए।
▪ अलग–अलग रियासतों के अपने–अपने दरबारी साहित्य और लोकसाहित्य ने भी इन बोलियों की पहचान को मजबूत बनाया।

4. राजस्थानी बोलियों की मुख्य भाषिक विशेषताएँ

  • ध्वनि–प्रणाली: कई बोलियों में “स” की जगह “ह” उच्चारित होता है, जैसे – “सांस” → “हांस”, “संसार” → “हंसार” आदि (कुछ क्षेत्रों में)।
  • क्रिया–रूप: “कर्यो”, “आव्यो”, “ग्यो” जैसे रूप; स्त्रीलिंग में “करि”, “आवि” आदि।
  • सर्वनाम: “मैं” की जगह “म्हां”, “तुम” की जगह “थूं/थां”, “हम” की जगह “असां/आपा” आदि।
  • कारक चिन्ह: “रो, री, रा” (का, की, के) – “म्हारो, थारी, इनकेरा” आदि।
  • शब्दावली: कई विशिष्ट शब्द – जैसे “घणी” (बहुत), “कणी” (थोड़ा/कितना), “केरो” (किसका) आदि।
  • वाक्य–रचना: सामान्यतः कर्ता–कर्म–क्रिया क्रम (S–O–V); परन्तु जोर देने के लिए क्रम बदल सकता है।

5. परीक्षा में पूछे जाने वाले सामान्य प्रश्न–बिंदु

  • कौन–सी बोली किस क्षेत्र/जिले में बोली जाती है?
  • किस क्षेत्र को क्या कहा जाता है – जैसे मारवाड़, मेवाड़, वागड़, ढूँढाड़ आदि।
  • किस बोली पर किस अन्य भाषा/बोली का प्रभाव है (ब्रज, गुजराती, पंजाबी, हरियाणवी आदि)।
  • किसी प्रसिद्ध लोकगीत/लोकनाट्य/साहित्यकार की रचना किस बोली में है – (यह आगे के Parts – कृतियाँ/साहित्यकार में आएगा)।
  • कौन–सी बोली राजस्थान की नहीं है? – जैसे प्रश्नों में “भोजपुरी, अवधी, मगही” इत्यादि दे दिए जाते हैं।

6. क्षेत्रीय बोलियाँ और लोकसाहित्य

▪ प्रत्येक बोली का अपना समृद्ध लोकगीत, लोककथा, कहावतें, लोकनाट्य एवं धार्मिक–अनुष्ठान होते हैं।
मारवाड़ी, मेवाड़ी, ढूँढाड़ी, हाड़ौती में लिखित साहित्य भी बहुत अधिक विकसित हुआ है, जबकि वागड़ी, बागड़ी, मेवाती में लोक–परम्परा अधिक सशक्त है।
▪ आधुनिक समय में अधिकांश साहित्यकार मानकीकृत राजस्थानी या अपने क्षेत्र विशेष की बोली में लेखन करते हैं, जिससे बोलियों का संरक्षण भी होता है।
Quick Revision Points (One-Liner):
▪ मारवाड़ क्षेत्र की बोली – मारवाड़ी
▪ मेवाड़ क्षेत्र की बोली – मेवाड़ी
▪ ढूँढाड़ क्षेत्र की बोली – ढूँढाड़ी
▪ हाड़ौती क्षेत्र की बोली – हाड़ौती
▪ वागड़ क्षेत्र (बांसवाड़ा–डूंगरपुर) – वागड़ी
▪ मेवात क्षेत्र (अलवर–भरतपुर) – मेवाती
▪ शेखावाटी क्षेत्र – शेखावाटी बोली
▪ गंगानगर–हनुमानगढ़ सीमा क्षेत्र – बागड़ी
राजस्थान की क्षेत्रीय बोलियाँ – MCQ Quiz

राजस्थान की क्षेत्रीय बोलियाँ – MCQ Practice Set

कुल प्रश्न: 60 | Level: REET, RPSC, Patwari, VDO, 3rd Grade, CET
1. मारवाड़ी बोली मुख्यतः किस क्षेत्र में बोली जाती है?
व्याख्या: मारवाड़ी बोली मारवाड़ क्षेत्र (जोधपुर, बाड़मेर, जैसलमेर आदि) की प्रमुख बोली है, इसलिए सही विकल्प मारवाड़ क्षेत्र है।
2. ढूँढाड़ी बोली किस ऐतिहासिक क्षेत्र की प्रमुख बोली मानी जाती है?
व्याख्या: जयपुर, टोंक, दौसा, सवाईमाधोपुर वाला क्षेत्र पारम्परिक रूप से ढूँढाड़ कहलाता है और यहाँ की बोली ढूँढाड़ी है।
3. मेवाड़ी बोली मुख्य रूप से किस क्षेत्र में प्रचलित है?
व्याख्या: उदयपुर, राजसमंद, चित्तौड़गढ़, भीलवाड़ा आदि मेवाड़ क्षेत्र में मेवाड़ी बोली बोली जाती है।
4. हाड़ौती बोली निम्न में से किस जिले से सर्वाधिक सम्बद्ध है?
व्याख्या: हाड़ौती क्षेत्र में कोटा, बूंदी, झालावाड़ और बारां प्रमुख जिले हैं, इसलिए कोटा सही है।
5. मेवाती बोली मुख्यतः किस क्षेत्र में बोली जाती है?
व्याख्या: मेवाती बोली मेवात क्षेत्र की बोली है, जो अलवर एवं भरतपुर जिले के कुछ भागों में पाई जाती है।
6. शेखावाटी बोली किन जिलों से सम्बद्ध मानी जाती है?
व्याख्या: शेखावाटी अंचल में मुख्यतः सीकर, झुंझुनूं व चुरू जिले आते हैं, जहाँ शेखावाटी बोली बोली जाती है।
7. बागड़ी बोली राजस्थान के किस भाग में अधिक प्रचलित है?
व्याख्या: बागड़ी बोली मुख्यतः श्रीगंगानगर और हनुमानगढ़ जिलों तथा उत्तर-पश्चिमी राजस्थान की सीमा क्षेत्र में बोली जाती है।
8. वागड़ी बोली किन जिलों से सम्बन्धित है?
व्याख्या: वागड़ क्षेत्र, जिसमें मुख्यतः बांसवाड़ा, डूंगरपुर और आस–पास के आदिवासी क्षेत्र आते हैं, की बोली वागड़ी है।
9. गोड़वाड़ी बोली मुख्यतः किस भाग में बोली जाती है?
व्याख्या: गोड़वाड़ी बोली पाली, सिरोही और उदयपुर के कुछ सीमावर्ती भागों (आबू रोड आदि) में बोली जाती है।
10. निम्न में से कौन–सी बोली राजस्थानी की क्षेत्रीय बोली नहीं मानी जाती?
व्याख्या: भोजपुरी पूर्वी उत्तर प्रदेश और बिहार की बोली है; मारवाड़ी, मेवाड़ी और ढूँढाड़ी राजस्थानी की प्रमुख बोलियाँ हैं।
11. राजस्थानी भाषा को भाषावैज्ञानिक दृष्टि से किस समूह में रखा जाता है?
व्याख्या: राजस्थानी भाषा इंडो–आर्यन की नवीन (New Indo-Aryan) शाखा में रखी जाती है, इसलिए विकल्प (b) उचित है।
12. किस बोली को कभी–कभी पूरी राजस्थानी भाषा के लिए भी बोलचाल में उपयोग कर लिया जाता है?
व्याख्या: अधिकांश लोग पूरे राजस्थान की भाषा को ही “मारवाड़ी” कह देते हैं, जबकि यह तकनीकी रूप से एक क्षेत्रीय बोली है।
13. “घणी, कणी, म्हारो, थारो” जैसे शब्द किस समूह की बोलियों में अधिक मिलते हैं?
व्याख्या: ये सभी शब्द राजस्थानी क्षेत्र की बोलियों (विशेषकर मारवाड़ी, मेवाड़ी आदि) की विशिष्ट शब्दावली के उदाहरण हैं।
14. “रो, री, रा” कारक चिह्न किस भाषा–परिवार की विशेषता हैं?
व्याख्या: “रो, री, रा” जैसे संबंध–सूचक कारक चिह्न राजस्थानी तथा कुछ हद तक गुजराती आदि पश्चिमी इंडो–आर्यन भाषाओं में मिलते हैं।
15. निम्न में से किस बोली पर पंजाबी और हरियाणवी का प्रभाव अधिक माना जाता है?
व्याख्या: बागड़ी बोली राजस्थान–हरियाणा–पंजाब की सीमा पर बोली जाती है, इसलिए इस पर पंजाबी और हरियाणवी दोनों का प्रभाव पाया जाता है।
16. वागड़ी बोली पर किस भाषा/बोलियों का प्रभाव अधिक है?
व्याख्या: वागड़ी बोली दक्षिण राजस्थान के भील–बहुल व गुजरात सीमा क्षेत्रों में बोली जाती है, इसलिए गुजराती और भीली भाषिक प्रभाव दिखता है।
17. “ढूँढाड़” नाम किस शहर से ऐतिहासिक रूप से जुड़ा है?
व्याख्या: जयपुर रियासत का क्षेत्र ढूँढाड़ कहलाता था; उसी से “ढूँढाड़ी” बोली का नाम निकला है।
18. “मेवात” किस समुदाय से सम्बन्धित क्षेत्र का नाम है, जहाँ मेवाती बोली बोली जाती है?
व्याख्या: मेवात क्षेत्र का नाम वहाँ के मेव समुदाय से जुड़ा है, और यही से मेवाती बोली का नाम भी आता है।
19. निम्न में से कौन–सा युग्म सही संगति नहीं है?
व्याख्या: बांगड़ क्षेत्र की बोली बांगड़ी/बांगड़–सम्बन्धी कही जा सकती है; वागड़ क्षेत्र की बोली वागड़ी है। अतः बांगड़–वागड़ी संगति गलत है।
20. किस बोली में “स” ध्वनि के स्थान पर कहीं–कहीं “ह” का प्रयोग पाया जाता है (जैसे सांस → हांस)?
व्याख्या: कुछ राजस्थानी बोलियों में ध्वन्यात्मक परिवर्तन के कारण “स” → “ह” का उच्चारण पाया जाता है; यह द्रविड़ भाषाओं की विशेषता नहीं है।
21. हाड़ौती अंचल की बोली कौन–सी है?
व्याख्या: कोटा, बूंदी, झालावाड़, बारां वाला क्षेत्र हाड़ौती कहलाता है और यहाँ हाड़ौती बोली बोली जाती है।
22. “सीकर, झुंझुनूं, चुरू” – यह क्षेत्र किस बोली के लिए प्रसिद्ध है?
व्याख्या: सीकर, झुंझुनूं और चुरू को मिलाकर शेखावाटी क्षेत्र माना जाता है, जहाँ शेखावाटी बोली बोली जाती है।
23. निम्न में से कौन–सा युग्म सही मेल खाता है?
व्याख्या: गंगानगर व हनुमानगढ़ बागड़ी बोली के प्रमुख क्षेत्र हैं; अन्य युग्म सही मेल नहीं खाते।
24. “म्हां, थां, असां” जैसे सर्वनाम किस प्रकार की भाषा–संरचना के उदाहरण हैं?
व्याख्या: “म्हां, थां, असां” जैसे शब्द राजस्थानी क्षेत्र की बोलियों में प्रचलित सर्वनाम रूप हैं।
25. निम्न में से कौन–सी बोली दक्षिणी राजस्थान से सम्बद्ध नहीं है?
व्याख्या: बागड़ी उत्तर–पश्चिमी राजस्थान (गंगानगर–हनुमानगढ़) क्षेत्र की बोली है, दक्षिणी राजस्थान से नहीं।
26. मेवाड़ी बोली पर सामान्यतः किन भाषाओं/बोलियों का प्रभाव माना जाता है?
व्याख्या: मेवाड़ी मेवाड़ क्षेत्र की बोली है जिस पर निकटवर्ती गुजराती एवं भीली बोलियों का प्रभाव परिलक्षित होता है।
27. ढूँढाड़ी बोली की लिपि सामान्यतः क्या होती है?
व्याख्या: अधिकांश राजस्थानी बोलियों की तरह ढूँढाड़ी भी देवनागरी लिपि में ही लिखी जाती है।
28. राजस्थानी बोलियों में वाक्य–क्रम सामान्यतः कैसा होता है?
व्याख्या: हिंदी की तरह राजस्थानी बोलियों में भी सामान्य वाक्य–क्रम कर्ता–कर्म–क्रिया (S–O–V) होता है।
29. “घणी मोटी किताब है” – यह वाक्य किस प्रकार की बोली के समीप है?
व्याख्या: “घणी” शब्द के प्रयोग से यह राजस्थानी (विशेषतः मारवाड़ी/मेवाड़ी) जैसे वाक्य का उदाहरण है।
30. निम्न में से किस बोली में आदिवासी–भीली तत्व अधिक पाए जाते हैं?
व्याख्या: वागड़ी बोली आदिवासी–भील बहुल क्षेत्र में बोली जाती है; अतः भीली तत्व यहाँ प्रबल हैं।
31. “थारो नाम सु के?” – यह वाक्य किस बोली के निकट है?
व्याख्या: “थारो, सु के” जैसे प्रयोग मारवाड़ी/मेवाड़ी प्रकार की राजस्थानी बोलियों में प्रचलित हैं।
32. बागड़ी बोली किन दो राज्यों की सीमा क्षेत्रों से भी जुड़ी है?
व्याख्या: बागड़ी बोली राजस्थान की सीमा पर हरियाणा और पंजाब के सन्निकट क्षेत्रों में भी बोली जाती है।
33. “कर्यो, आव्यो, ग्यो” जैसे क्रियारूप किस भाषा–समूह के हैं?
व्याख्या: “कर्यो, आव्यो, ग्यो” आदि क्रियारूप राजस्थानी बोलियों (विशेषतः मारवाड़ी आदि) के विशिष्ट रूप हैं।
34. निम्न में से कौन–सी बोली गुजरात सीमा के अत्यधिक निकट क्षेत्र में बोली जाती है?
व्याख्या: वागड़ी बोली बांसवाड़ा–डूंगरपुर क्षेत्र में बोली जाती है, जो गुजरात सीमा के अत्यधिक निकट है।
35. “ढूँढाड़ी” बोली से सम्बन्धित लोक–साहित्य किस क्षेत्र के लोक–जीवन को अधिक अभिव्यक्त करता है?
व्याख्या: ढूँढाड़ी बोली जयपुर–ढूँढाड़ क्षेत्र की बोली है; इसका लोकसाहित्य वहीं के लोक–जीवन का चित्रण करता है।
36. “मेवाड़ी” और “मारवाड़ी” बोलियाँ किस प्रकार के क्षेत्र–नामों पर आधारित हैं?
व्याख्या: मेवाड़ तथा मारवाड़ ऐतिहासिक–भौगोलिक क्षेत्र हैं; इन्हीं के आधार पर मेवाड़ी और मारवाड़ी नाम बने हैं।
37. “राजस्थानी बोलियाँ किस लिपि में अधिकतर लिखी जाती हैं?”
व्याख्या: मानक लेखन में राजस्थानी की सभी प्रमुख बोलियाँ देवनागरी लिपि में ही लिखी जाती हैं।
38. निम्न में से कौन–सा कथन सही है?
व्याख्या: राजस्थानी भाषा इंडो–आर्यन भाषा–परिवार की सदस्य है; इसे नई इंडो–आर्यन शाखा में रखा जाता है।
39. “म्हारो, थारो, जाको” – ये किस प्रकार के शब्द हैं?
व्याख्या: ये सभी “मेरा, तुम्हारा, जिसका” जैसे संबंध–सूचक सर्वनाम हैं, जो राजस्थानी बोलियों में प्रयुक्त होते हैं।
40. निम्न में से कौन–सी बोली ब्रज क्षेत्र से अधिक निकटता रखती है?
व्याख्या: मेवाती बोली अलवर–भरतपुर क्षेत्र में बोली जाती है, जो ब्रज भाषा क्षेत्र के निकट है; इस कारण ब्रज का प्रभाव यहाँ दिखता है।
41. “अरावली पर्वतमाला के पश्चिम में मुख्यतः कौन–सी बोली अधिक फैली हुई मानी जाती है?”
व्याख्या: अरावली के पश्चिमी मरुस्थलीय भाग में मारवाड़ी बोली का व्यापक प्रसार है।
42. “जोधपुर, पाली, नागौर” – ये जिले मुख्यतः किस बोली से जुड़े हैं?
व्याख्या: इन जिलों में राजस्थानी की मारवाड़ी बोली प्रमुख रूप से बोली जाती है।
43. निम्न में से किस बोली में मरुभूमि जीवन से जुड़े विशेष शब्द अधिक मिलते हैं?
व्याख्या: थार मरुभूमि क्षेत्र की लोक–संस्कृति और मरु–जीवन से जुड़े शब्द मारवाड़ी बोली में विशेष रूप से प्रचुर मात्रा में मिलते हैं।
44. “सीकर, झुंझुनूं” क्षेत्र की बोली के लिए कौन–सा नाम प्रयुक्त होता है?
व्याख्या: सीकर और झुंझुनूं शेखावाटी क्षेत्र के मुख्य जिले हैं, इसलिए यहाँ की बोली शेखावाटी कहलाती है।
45. “कोटा, बूंदी” जिले किस बोली–क्षेत्र के अंग हैं?
व्याख्या: कोटा और बूंदी हाड़ौती अंचल के प्रमुख जिले हैं, जहाँ हाड़ौती बोली बोली जाती है।
46. “अलवर, भरतपुर” – ये जिले किस बोली से अधिक सम्बद्ध हैं?
व्याख्या: अलवर और भरतपुर के मेवात क्षेत्र में मेवाती बोली बोली जाती है।
47. “उदयपुर, राजसमंद” – ये जिले किस बोली के क्षेत्र में आते हैं?
व्याख्या: उदयपुर और राजसमंद मेवाड़ क्षेत्र में हैं, जहाँ मेवाड़ी बोली प्रमुख है।
48. “मैं स्कूल जा रयो सूँ” – यह किस प्रकार की बोली का वाक्य माना जा सकता है?
व्याख्या: “जा रयो सूँ” जैसे रूप राजस्थानी बोलियों (विशेषतः मारवाड़ी/मेवाड़ी) में आम हैं।
49. किस बोली क्षेत्र में “घूमर” जैसे प्रसिद्ध लोकनृत्य की परम्परा विशेष रूप से मिलती है?
व्याख्या: घूमर नृत्य मुख्यतः मेवाड़ व मारवाड़ क्षेत्रों की लोक–संस्कृति से जुड़ा है, जहाँ मेवाड़ी व मारवाड़ी बोलियाँ बोली जाती हैं।
50. निम्न में से कौन–सा संयोजन गलत है?
व्याख्या: मेवात क्षेत्र की बोली मेवाती है, न कि मेवाड़ी। मेवाड़ी मेवाड़ क्षेत्र की बोली है, अतः विकल्प (d) गलत है।
51. “डिंगल” शब्द किससे अधिक सम्बन्धित है?
व्याख्या: डिंगल मध्यकालीन वीर–रस प्रधान राजस्थानी काव्य की परम्परा है, जो विभिन्न राजस्थानी बोलियों पर आधारित है।
52. “पिंगल” परम्परा सामान्यतः किस प्रकार के काव्य से जुड़ी मानी जाती है?
व्याख्या: पिंगल को राजस्थानी की श्रृंगार–भक्ति आदि विषयक काव्य भाषा के रूप में देखा जाता है।
53. राजस्थानी बोलियों में “रो/री/रा” का उपयोग हिंदी के किस कारक के समतुल्य है?
व्याख्या: “रो, री, रा” का प्रयोग “का, की, के” के अर्थ में होता है, जैसे “म्हारो घोड़ा” = मेरा घोड़ा।
54. “घणी बार कहा” – यहाँ “घणी” शब्द का अर्थ क्या है?
व्याख्या: राजस्थानी बोलियों में “घणी” का अर्थ “बहुत” होता है; घणी बार = बहुत बार।
55. “कणी पानी देजे” – वाक्य में “कणी” का प्रचलित अर्थ क्या है?
व्याख्या: “कणी” का अर्थ “थोड़ा” होता है; “कणी पानी देजे” = थोड़ा पानी दीजिए।
56. राजस्थानी बोलियों में “सू” (जैसे – म्हारो नाम रमेश सूँ) किस व्याकरणिक अर्थ में आता है?
व्याख्या: “सू” यहाँ “हूँ” (I am) के अर्थ में है – “म्हारो नाम रमेश सूँ” = मेरा नाम रमेश है।
57. राजस्थानी बोलियों के अध्ययन से निम्न में से क्या ज्ञात होता है?
व्याख्या: मारवाड़ी, मेवाड़ी, ढूँढाड़ी, हाड़ौती आदि में शब्दावली, उच्चारण और क्रियारूप सभी स्तरों पर विविधता मिलती है।
58. राजस्थानी बोलियों का संरक्षण मुख्यतः किसके माध्यम से हो रहा है?
व्याख्या: लोकसाहित्य, लोकगीत–कथाएँ, नाट्य और आधुनिक साहित्यिक–पत्रकारीय लेखन मिलकर इन बोलियों का संरक्षण कर रहे हैं।
59. प्रतियोगी परीक्षाओं में राजस्थानी बोलियों पर प्रश्न मुख्यतः किस प्रकार से पूछे जाते हैं?
व्याख्या: REET, RPSC आदि परीक्षाओं में बोलियों पर अधिकतर MCQ व Matching आधारित एक–पंक्ति प्रश्न पूछे जाते हैं।
60. राजस्थानी बोलियों का ज्ञान किस कारण से विशेष उपयोगी है?
व्याख्या: बोलियों का ज्ञान प्रदेश की संस्कृति–लोकजीवन समझने के साथ–साथ प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए भी अत्यंत महत्वपूर्ण है।
आपका Score यहाँ दिखेगा।

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